व्यव्साय चुनने की पध्दति

व्यव्साय चुनने की पध्दति पहली बात यह देखिए कि कुण्डली में धनयोग है या नहीं ? यदि है तो उत्तम है, मध्यम है या निकृष्ट ? इस सम्बन्ध में निम्नलिखित कुछ नियम ध्यान में रखने योग्य हैं। द्वितीय स्थान और Read more

धन कब मिलेगा ?

धन कब मिलेगा ? धन की प्राप्ति तब होती है जब ग्रह शुभ फल देते हैं । ग्रह दो प्रकार मे शुभ फल देते हैं। एक तो जब शुभ धनदायक भावों लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम, दशम, एकादश के Read more

मित्र, भाई यॉ सम्बंधी – किससे धन लाभ होगा ?

मित्र, भाई यॉ सम्बंधी – किससे धन लाभ होगा ? 1. धन भाव, लग्न भव, लाभ भाव आदि भाव धन के द्योतक । इन भावों से जिन सम्बंधियों आदि का घनिष्ठ (युति, दृष्टि आदि द्वारा) सम्बंध होता है उन सम्बंधियों Read more

जातक का व्यवसाय

जातक का व्यवसाय मनुष्य का व्यवसाय ‘Profession’ क्या है यह एक बहुत जटिल प्रश्न है। ज्योतिष शास्त्रकारों ने बहुधा कर इस प्रश्न पर विचार करने के लिये दशम भाव की ओर संकेत किया है। वराह मिहिर आचार्य तथा इसी प्रकार Read more

शुक्र और धन

शुक्र और धन शुक्र ग्रह की द्वादश स्थिति भी धन दिलाने में कुछ कम महत्व नहीं रखती । इस महत्व को दृष्टि में रखते हुए इस भोगात्मक (Pleasure Loving) ग्रह के लिये एक स्वतंत्र अध्याय की व्यवस्था की गई है Read more

सुदर्शन तथा धनबाहुल्य

ग्रहों के फल का एक लग्न मात्र से फल न कहकर तीनों लग्नों लग्न, सूर्यलग्न, चन्द्रलग्न से विचार कर कहने का नाम ‘सुदर्शन’ पद्धति है । स्पष्ट ही है कि जब कोई ग्रह न केवल लग्न से ही शुभ अथवा Read more

कारकाख्ययोग से धनप्रप्ति

कारकाख्ययोग से धनप्रप्ति जब कोई ‘स्वक्षेत्री ‘ अथवा ‘उच्च’ ग्रह परस्पर केन्द्र में स्थित होते हैं तो ‘कारकाख्य’ योग को बनाते हैं । और यह ‘कारकाख्य’ और भी बलवान होता है जब कि उक्त ‘उच्च’ आदि ग्रहों की स्थिति लग्न Read more

स्वामिदृष्ट भाव से धनप्रप्ति

स्वामिदृष्ट भाव से धनप्रप्ति आचार्य वराहमिहिर के सुपुत्र पृथुयशस् का कहना है कि :- “यो यो भावः स्वामियुक्तो दृष्टों वा तस्य तस्यास्ति वृद्धिः” अर्थ – जो जो भाव अपने स्वामी द्वारा युक्त तथा दृष्ट होता है। उस उस भाव की Read more

अधियोग से धनप्रप्ति

अधियोग से धनप्रप्ति अधियोग चन्द्रादि लग्नों से षष्ठ, सप्तम तथा अष्टम स्थानों में शुभ ग्रहों की स्थिति से उत्पन्न होते हैं। अधियोग क्यों शुभ फल देते हैं ? इसका कारण है कि शुभ ग्रहों की उक्त षष्ठ, सप्तम तथा अष्टम Read more

नीचभंग राजयोग से मिलता है प्रसिद्धि, पैसा और सरकारी लाभ

नीचभंग राजयोग नीचता भग राजयोग ग्रहों की नीचता के भंग से उत्पन्न होता है । और वह नीचता नीच राशि के स्वामी आदि के चन्द्र तथा लग्न से केन्द्र में स्थित होने से भंग होती है। इस नीचभंग राजयोग की Read more