कुंडली में राहु का फलादेश
कुंडली में राहु का फलादेश 1. राहु राजनीति, फिल्म लाईन में बहुत महत्वपूर्ण ग्रह है। 2. राहु योगों और दुर्योगों के प्रभाव को बढा देता है। 3. किसी जातक के लिए राहु बुध, शुक्र, शनि की राशियों में बैठा हो Read more
कुंडली में राहु का फलादेश 1. राहु राजनीति, फिल्म लाईन में बहुत महत्वपूर्ण ग्रह है। 2. राहु योगों और दुर्योगों के प्रभाव को बढा देता है। 3. किसी जातक के लिए राहु बुध, शुक्र, शनि की राशियों में बैठा हो Read more
1. जो भाव अपने स्वामी द्वारा दृष्ट हो तथा उस भाव पर शुभ दृष्टि भी हो तो स्वामी द्वारा दृष्ट भाव की बहुत वृद्धि होती है। 2. जब किसी शुभ भाव (लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम, दशम) का स्वामी Read more
अमला योग परिभाषा – (1) चन्द्रमा जिस राशि पर बैठा हो, उससे दसवें स्थान पर यदि शुभ ग्रह बैठा हो तो अमला योग होता है। (2) यदि लग्न से दसवें स्थान पर शुभ ग्रह हो तो भी अमला योग माना Read more
कुंडली में सूर्य से बनने वाले योग वासी योग परिभाषा – चन्द्रमा के अतिरिक्त कोई भी ग्रह या कई ग्रह सूर्य से बारहवें स्थान में विद्यमान हों तो वासी योग होता है। फल – वासी योग में जन्म लेने वाला Read more
ज्योतिष शास्त्र में ‘पंच महापुरुष योग’ वर्णित है । इन पाँचों में से कोई एक योग होने पर भी जातक महापुरुष होता है एवं देश-विदेश में कीर्ति लाभ करता है । इन पाँच योगों के नाम हैं-रुचक, भद्र, हंस, मालव्य Read more
मालिका योग परिभाषा – किसी भी भाव से 7 भावों में 7 ग्रह (सू. चं. मं. बु. वृ. शु. श.) हों तो भाव संबंधी मालिका योग होता है । फल – (1) यदि लग्न से लगातार सात भावों में सातों Read more
पापकर्तरी योग परिभाषा – लग्न से दूसरे भाव तथा बारहवें भाव में पाप ग्रह या अशुभ ग्रह स्थित हों तो पापकर्तरी योग बनता है। फल – पापकर्तरी योग में जन्म लेनेवाला व्यक्ति पाप करनेवाला कुचक्र रचने में प्रवीण, भिक्षुक और Read more
चन्द्र कृतोरिष्ट भंग योग परिभाषा – (1) पूर्ण चन्द्रमा शुभ ग्रह में या शुभ अंशों में हो हो तो कुण्डली में चन्द्र कृतोरिष्ट भंग योग बनता है। (2) चन्द्रमा वृष या कर्क राशि में हो अथवा मित्रों के गृह में Read more
पूर्णायु योग परिभाषा – (1) केन्द्र स्थान शुभ ग्रहों से युक्त हो, लग्नेश शुभ ग्रह के साथ बैठा हो तथा गुरु से देखा जाता हो तो पूर्णायु योग होता है । (2) लग्नेश केन्द्र स्थान में हो तथा उसके साथ Read more
गुरु चांडाल योग ज्योतिष में यह एक अशुभ योग माना जाता है, जो बृहस्पति (गुरु) और राहु के एक ही भाव में स्थित होने या आपस में दृष्टि सम्बंध बनाने से बनता है। अनुभव में ऐसा देखा गया है कि Read more