ज्योतिष शास्त्र में ‘पंच महापुरुष योग’ वर्णित है । इन पाँचों में से कोई एक योग होने पर भी जातक महापुरुष होता है एवं देश-विदेश में कीर्ति लाभ करता है । इन पाँच योगों के नाम हैं-रुचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश योग ।
रुचक योग
परिभाषा – मंगल अपनी ही राशि का होकर या मूल त्रिकोण अथवा उच्च राशि का होकर केन्द्र में स्थित हो तो रुचक योग होता है।
फल – रुचक योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से हृष्ट-पुष्ट और बलिष्ठ होता है । अपने कार्यों से वह संसार में प्रसिद्ध होता है तथा स्वयं के अतिरिक्त देश की कीर्ति को भी उज्जवल करता है। वह स्वयं राजा होता है अथवा अपना पूर्ण जीवन राजा के तुल्य ही व्यतीत करता है।
अपने देश की संस्कृति एवं सभ्यता के प्रति वह पूर्णतः जागरूक और सजग रहता है तथा उसकी उन्नति में निरन्तर प्रयत्नशील रहता है ।
उसकी चुम्बकीय शक्ति एवं प्रभावोत्पादक व्यक्तित्व के फलस्वरूप भक्त अथवा श्रद्धालुओं की भीड़ निरन्तर उसके इर्द-गिर्द रहती है तथा जीवन में उसे सच्चेमित्र प्राप्त होते हैं जो सदैव सहायक रहते हैं ।
ऐसे जातक का चरित्र उच्च कोटि का होता है और किसी भी प्रकार के प्रलोभन या दबाव में वह नहीं आता। आर्थिक दृष्टि से वह सम्पन्न रहता है, जीवन में द्रव्य का अभाव उसे महसूस नहीं होता तथा दीर्घ आयु प्राप्त करता है । सेना या मिलिटरी में होने पर ऐसा व्यक्ति उच्च अधिकारी बनता है । या फिर वह नेता, कमाण्डर या मुख्य मन्त्री बनता है । रुचक योग तभी सफल एवं श्रेष्ठ बनता है, जब भौम बलिष्ठ होकर केन्द्र स्थित हो जाता है ।
भद्र योग
परिभाषा – यदि बुध अपनी राशि का होकर या मूल त्रिकोण या उच्चराशि का होकर केन्द्र में स्थित हो तो भद्र योग होता है ।
फल – भद्र योग में उत्पन्न मनुष्य सिंह के समान पराक्रमी और शत्रुओं का विनाश करने वाला होता है। विशाल वक्षस्थल, प्रभावोत्पादक व्यक्तित्व और ऊँचे उठते रहने की निरन्तर चाह ही उसकी प्रमुख विशेषता होती है । बान्धवों, मित्रों एवं सम्पर्क में आने वाले लोगों की हर संभव सहायता करने को उद्यत रहता है ।
इस जातक की बुद्धि भी विलक्षण होती है तथा पेचीदा से पेचीदा कार्य भी वह सहजता से कर लेता है ।
जीवन से धीरे-धीरे प्रगति करता है, परन्तु अंत में सर्वोच्च पद पाने में सफल हो जाता है या अपने जीवन का ध्येय पूर्ण कर लेता है। दीर्घायु होता है। व्यापारिक कार्यों में ऐसे जातक अधिक सफल होते हैं ।
टिप्पणी – बुध मुख्यतः व्यापार एवं बुद्धि का हेतु होता है । अतः बुध जब केन्द्र भाव में बलिष्ठ होकर बैठ जाता है तो निश्चय ही जातक या तो व्यापार को देश-विदेश में फैला देता है या फिर बुद्धि के कारण के कारण किसी उच्च पद प्राप्त करने में सफल हो जाता है।
बुध कारण ऐसे व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नहीं घबराते और संकटों एवं बाधाओं के बीच भी अपना रास्ता ढूंढ़ लेते हैं। तुरन्त निर्णय लेने की इनमें विशेष क्षमता होती है ।
हंस योग
परिभाषा – बृहस्पति अपनी राशि का होकर या मूल त्रिकोण, अथवा उच्च राशि का होकर केन्द्र में स्थित हो तो हंस योग होता है ।
फल – हंस योग रखने वाला जातक अति सुन्दर व्यक्तित्व वाला पुरुष होता है । रक्तिम चेहरा, ऊँची नासिका, सुन्दर चरण, हँसमुख गौरांग, उन्नत ललाट और विशाल वक्षस्थल वाला ऐसा व्यक्ति मधुर भाषी होता है। उसके मित्रों एवं प्रशंसकों की संख्या बढ़ती ही रहती है तथा वह सभी के साथ श्रेष्ठ व्यवहार करने का इच्छुक होता है । ऐसा व्यक्ति निष्पक्ष न्याय करता है तथा सफल वकील या जज बनता है।
टिप्पणी – हंस योग भी पंच महापुरुष योगों में से एक है, परन्तु इस योग की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं। पहली तो यह कि हंस योग रखने वाला व्यक्ति बात का धनी होने के साथ-साथ निष्पक्ष निर्णय देने की पूर्ण क्षमता रखता है, वह किसी भी प्रलोभन या दबाव में आकर अपने पथ से विचलित नहीं होता। दूसरा यह कि ऐसा योग रखने वाला व्यक्ति चुम्बकीय व्यक्तित्व लिए हुए होता है । जिसके कारण उसके परिचितों की संख्या बढ़ती ही रहती है।

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हंस योग वाले व्यक्ति दीर्घायु भी होते हैं और साठ से सौ के बीच उम्र भोगते हैं । वृद्धावस्था सुखद रहती है । पारिवारिक दृष्टि से भी ऐसा जातक सफल रहता है।
मालव्य योग
परिभाषा – जब शुक्र अपनी ही राशि का होकर या मूल त्रिकोण अथवा उच्च राशि का होकर केन्द्र में स्थित हो तो मालव्य योग होता है ।
फल – मालव्य योग वाले व्यक्ति का शारीरिक ढाँचा व्यवस्थित, आकर्षक एवं सुन्दर होता है। ऐसा जातक पतले होंठों वाला, सर्वावयव सम्पन्न शरीर वाला, लाल वर्ण शरीर, पतली कमर वाला, चन्द्रमा के समान कान्ति वाला, लम्बी नाक वाला, सुन्दर कपोल वाला, सुन्दर प्रकाशवान नेत्र तथा अत्यन्त आकर्षक व्यक्तित्व वाला होता है ।
ऐऐ व्यक्ति का दिमाग मजबूत रहता है तथा वह कठिन से कठिन स्थितियों में भी विचलित नहीं होता ।
जीवन में इसे धन की ओर से कोई चिन्ता करनी ही नहीं पड़ती, धन स्वतः ही इस योग वाले के पास खिंचता चला आता है । उत्तम सवारी सुख भी मिलता है तथा जीवन में विविध भोगों का भोग सुखपूर्वक करता है। शिक्षा, संस्कृति एवं सभ्यता की दृष्टि से ऐसा जातक उच्च कोटि का तथा ख्यातिप्राप्त होता है एवं देश-विदेश में अपने कार्यों से पूजा जाता है ।
टिप्पणी – मालव्य योग वाला व्यक्ति कलाकार होता है। यदि केन्द्र में अकेला शुक्र स्वराशि या उच्च का होकर स्थित हो तो जातक काव्य, संगीतादि क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त कर नाम कमाता है। ऐसे जातक सफल कवि, चित्रकार, कलाकार या नृत्यकार होते हैं तथा जिस क्षेत्र में भी घुस जाते हैं उसमें ख्याति प्राप्त कर लेते हैं।
सहृदयता इनका मौलिक गुण होता है। यदि मालव्य योग के साथ सफल राज योग भी हो तो व्यक्ति राजनीति में निस्सन्देह उच्च पद प्राप्त करता है।
मालव्य योग होने से व्यक्ति कई स्त्रियों के सम्पर्क में भी आता है तथा उनसे लाभ भी उठाता है । यों भी शुक्र वाहन, सुख एवं भोग-विलास का कारक है, फलस्वरूप शुक्र सम्बन्धित सभी वस्तुओं का वह पूर्ण सुख उठाता है । मालव्य योग दीर्घायु भी प्रदान करता है ।
यदि मालव्य और हंस दोनों योग कुण्डली में हों तो जातक निस्संदेह राजनीति में पटु होता है ।
शश योग
परिभाषा – शनि अपनी ही राशि का होकर या मूल त्रिकोण अथवा उच्च राशि का होकर यदि केन्द्र में स्थित हो तो शश योग होता है ।
फल – ‘शश’ या ‘शशक’ योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति साधारण कुल में जन्म लेकर भी राजनीति-विशारद होता है। उसके घर में नौकर-चाकर रहते हैं तथा सेवकों पर उसकी आज्ञा चलती है ।
वह गाँव का मुखिया, नगरपालिकाध्यक्ष या प्रसिद्ध नेता होता है। स्वयं राजा होता है या राजा तुल्य रहता है। सरल स्वभाव, सौम्य भाव एवं राजनीति के दाव पेंच दोनों मिलकर उसके व्यक्तित्व को अपूर्व बना देते हैं।
टिप्पणी – शश योग में शनि ही प्रधान होता है। वह या तो स्व- राशिस्थ, उच्च या मूल त्रिकोण गत हो । शश योग जीवन में धीरे-धीरे उन्नति करता है ।
योगों का अध्ययन करते समय ध्यान रखने वाली बातें
इन योगों का अध्ययन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सम्बन्धित ग्रह निर्मल, अवेध, अवक्री और 10 से 25 अंशों के बीच में हो। क्योंकि 1 से 5 तक अंश तथा 25 से 30 अंश निर्बल कहे गये हैं । 10 से 20 अंश सर्वोत्तम कहे गये हैं ।
यदि ग्रह निर्बल हो तो सम्बन्धित योग होने पर भी वह पूर्ण फल नहीं देगा तथा न अधिक प्रभावोत्पादक होगा।
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