ग्रहों की राशियाँ

  • सूर्य ग्रह की राशि सिंह है।
  • चन्द्रमा ग्रह की राशि कर्क है।
  • मंगल ग्रह की राशि मेष और वृश्चिक है।
  • बुध ग्रह की राशि मिथुन और कन्या है।
  • बृहस्पति ग्रह की राशि धनु और मीन है।
  • शुक्र ग्रह की राशि वृष और तुला है ।
  • शनि ग्रह की राशि मकर और कुम्भ है।

राहु केतु ग्रह छाया ग्रह है इनकी अपनी कोई राशि नहीं होती। राहु केतु जिस राशि में भ्रमण कर रहें होते हैं उस राशि के ग्रह स्वामी का फल करते हैं।

ग्रहों की दृष्टियां

सूर्य अपने से सातवें घर को देखता है।

चन्द्र अपने से सातवें घर को देखता है।

मंगल अपने से चौथे, सातवें और आठवें घर को देखता है।

बुध अपने से सातवें घर को देखता है।

बृहस्पति अपने से पांचवे, सातवें और नौवें घर को देखता है।

शुक्र अपने से सातवें घर को देखता है।

शनि तीसरे, सातवें और दसवें घर को देखता है।

लाल किताब के अनुसार ऊँच नीच के ग्रह

कोई भी ग्रह जिस राशि में उच्च का होता है वो ही ग्रह उस राशि से सातवीं राशि में नीच का होगा जिस राशि में नीच का होता है उस राशि से सातवीं राशि में उच्च का होगा। जैसे

  • सूर्य धनु राशि में उच्च का होता है परन्तु मिथुन राशि में नीच का होता है।
  • चंद्र वृष राशि में ऊँच का होता है तो वृश्चिक राशि में नीच का होता है।
  • मंगल मकर राशि में उच्च का होता है तो कर्क राशि में नीच का होता है।
  • बुध कुम्भ राशि में उच्च का होता है लेकिन सिंह राशि में नीच का होता है।
  • बृहस्पति वृश्चिक राशि में उच्च का होता है और वृष राशि में नीच का होता है।
  • शुक्र मीन राशि में उच्च का होता है तो कन्या राशि में नीच का होता है।
  • शनि तुला में उच्च का होता है और मेष राशि में नीच का होता है।

ग्रहों के रोग

सूर्य – हड्डी रोग, दिल की बीमारी, ज्वर, पेट, आंखों संबंधी।

चन्द्र – फेफड़े संबंधी, कफ ।

मंगल – खून संबंधी, खोपड़ी संबंधी, चोट लगना, अंग का कट जाना, अण्डकोष, बवासीर ।

बुध – दिमागी, गले संबंधी, चेचक की बीमारी, चर्म रोग, आंत संबंधी, दांत संबंधी ।

बृहस्पति – कमर संबंधी, पैर संबंधी, सांस संबंधी, शुगर ।

शुक्र – पेशाब संबंधी, मुख संबंधी, गुर्दा (किड्नी), गुप्त-रोग ।

शनि – टांगों संबंधी, उदर रोग, खांसी ।

राहु – गैस संबंधी अचानक दुर्घटना।

केतु – दर्द संबंधी, जोड़ों का, पांव, टांगों संबंधी, हर्निया ।

ग्रहों की वस्तुएं

सूर्य – गेहूं, गुड़, तांबे का पैसा, तेजफल, तेजपत्ता, बंदर, शिलाजीत, भूरी, कीड़ियां, भूरी भैंस, राज दरबार, माणिक, तांबे जैसा रंग, गुलाबी वस्त्र और रथ ।

चन्द्र – दूध, चावल, मां, दादी, नानी, घोड़ा, मोती, रेशमी कपड़े, तह जमीन और चांदी ।

मंगल – पताशे, मिठाई, सोना, मूंगा, लाल मसूर की दाल, अखरोट, लाल गुलाब, गुड़ की रेवड़ी, लाल रंग, सैनिक, चीता, हिरण, ऊंठ।

बुध – साबुत मूंग की दाल, हरा रंग, हरा चारा, पन्ना, ढोलक, दांत, नाड़ी, तोता, भेड़, बकरी, चमगादड़, मेंढा, फिटकरी, बांस, पीली कोड़ियां, लसुड़े का वृक्ष, मटका और अण्डा ।

बृहस्पति – चने की दाल, केसर, प्लेटिनियम, पीले वस्त्र, पीला रंग, पुखराज, हल्दी, केले, बेसन के लड्डु, मुर्गा, वृद्ध पुरोहित, सोना और बब्बर शेर ।

शुक्र – चांदी, चावल, कपूर, दही, हीरा, दही रंग, जिमीकन्द, आलू, गाजर, सूती कपड़े, कांस्य का बर्त्तन, कपास, चमड़ी और खेती की भूमि ।

शनि – काले माँ साबुत की दाल, तवा, चिमटा, सरसों का तेल, चमड़ा, काली छतरी, शराब, नीलम, काला रंग, बादाम, सूखा नारियल, सांप, मछली, मगरमच्छ, भैंस, तंत्र-मंत्र और कीकर ।

राहु – जौं, पूजा वाला नारियल, धनिया साबुत, नीला रंग, सिक्का, कच्चा कोयला, गोमेद, हाथी, बिल्ली और सरसों ।

केतु – दो रंग का कम्बल (काला सफेद), प्याज, लहसुन, इमली, काले-सफेद तिल, चारपाई लकड़ी की, लहसुनिया, सलेटी रंग, नींबू, कुत्ता और छिपकली।

ग्रहों संबंधी व्यवसाय

सूर्य – जिस व्यक्ति का सूर्य शुभ हों, वो चेयरमैन, (किसी संस्थान का) राष्ट्रपति, राज्यपाल, निर्देशक, नेता, किसी चीज़ का अविष्कार करने वाला, वैल्डर, कपड़े का व्यापारी, सोने का कारीगर और खोदने वाला।

चन्द्र – समुद्री जहाज का कैप्टन, बन्दरगाह पर काम करना, मछेरा, नर्स, वार्ड ब्वॉय, जनरल मर्चेन्ट, मनोवैज्ञानिक संबंधी, होम साइंटिस्ट, मानसिक रोग चिकित्सक और प्राकृतिक चिकित्सा।

मंगल – पुलिस, सेना, मेकेनिकल, कैमिस्ट, नाई, लौहार, राजमिस्त्री, खिलाड़ी, मशीन चलाने वाला और इंजीनियर।

बुध – पोस्ट मास्टर, व्यापारी, प्रकाशक, एडीटर, परिवहन, स्पीकर (भाषण देने वाला) और मशीन-मिस्त्री (फिटर) ।

बृहस्पति – गुरू, प्राध्यापक, पुजारी, पादरी, जज, वैज्ञानिक, लेखक, ऑयल मर्चेन्ट, चर्बी मर्चेन्ट और शुगर मर्चेन्ट |

शुक्र – कवि, स्टेज एक्टर, गायक, डांसर, निर्देशक, पशुओं का डॉक्टर, ज्योतिष आचार्य, ऑटोमोबाइल इंजीनियर, बस, रेलवे चालक, किसान और लक्जूरिअस वस्तु ।

शनि – नेता, भिखारी, वकील, मंत्री, नौकर, पायलेट, अंतरिक्ष वैज्ञानिक और इलैक्ट्रोनिक इंजीनियर ।

ग्रहों के स्वभाव

क्रूर ग्रह – सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु।

सौम्य ग्रह – चन्द्र, बुध, शुक्र, बृहस्पति।

भाव संबंधी संबंधी व्यवसाय, शिक्षा, शारीरिक अंग (वस्तुएं)

पहला भाव – वैसे तो सब भावों का महत्व है परन्तु पहला भाव बहुत महत्वपूर्ण है। सदाचार, शौर्य, साहस, स्वास्थ्य, आयु, सामाजिक स्थिति, चरित्र, आत्मा, खिलाड़ी, खोपड़ी, और शारीरिक रंग-रूप और बनावट।

दूसरा भाव – धन, ज्वैलरी, मुंह, बाई आंख, नैन-नक्श, प्रेम कला, अभिनय, खजांची, कम्प्युटर साइंस, सभी प्रकार की धातु, बिरादरी लेखाकार और गणित।

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तीसरा भाव – लेखक, पेंटर, पराक्रम, छोटी यात्रा, छोटे भाई-बहिन, गला, बाजू, गायक, खूनी, पुलिसमैन, सेना में नौकरी, कलाकार, फैक्टरी, और फिजक्स।

चौथा भाव – भावों में से चौथा भाव बहुत महत्वपूर्ण है। मातृभूमि, मातृ भाषा, जयदाद, कार, सुख-शांति, मनोरंजन, पशु-पक्षी, खेती-बाड़ी, दूध, पोल्टरी-फॉर्म, होटल, टिम्बर, बिल्डिंग का सामान, सूचना-प्रसार, छाती फेफड़े, होम साइंस, मनोविज्ञान, सामाजिक विज्ञान, वनस्पति, सिविल एवं ऑटो इंजिनियर, प्राणि विज्ञान, भूगोल विद्या और परिवहन व्यापार ।

पांचवां भाव – यह भी बहुत महत्वपूर्ण भाव है। इस भाव से हम अध्ययन करेंगे – शिक्षा, ज्ञान, बच्चे और मस्तिष्क, प्रेम संबंधी, लॉटरी, दूरदर्शी, पेट, प्रिंसिपल, शिक्षा संस्थान में काम करने वाले, जर्नलिस्ट, एडवरटाइजमेंट, और संचार ।

छठा भाव – रोग, झगड़ा, पाचन शक्ति, कैमिकल, शत्रु, नौकर, शरीर में दर्द, पेट का निचला हिस्सा, लिवर, आंतें, कैमिस्ट्री, बायलोजी, मेडिकल साइंस, वकालत, डॉक्टर, कम्पाउंडर, नर्स, वकील, जज, कोर्ट में काम करने वाले, सेनेट्री, चमड़ा, रबड़, प्लास्टिक, तेल, चर्बी, दवाइयां। इस भाव से कर्जा भी देखा जाता है।

सातवां भाव – पति या पत्नी, शादीशुदाजीवन, चरित्र, सम्भोग, निजी व्यापार, मित्र, जीवन-साथी, गुर्दा, गुप्त अंग, शुगर और बिजनेस मैनेजमेन्ट।

आठवां भाव – आठवें भाव से अध्ययन करेंगे मृत्यु के कारण, उम्र, मृत्योपरांत यश, इतिहास, प्राचीन विद्या, अण्डकोष, ज्योतिष, पुरातत्व और भू-वर्ग शास्त्र ।

नौवां भाव – किस्मत, धर्म में विश्वास, धार्मिक शिक्षा, पादरी, पुजारी, कूल्हा, और कमर ।

दसवां भाव – पिता, रुतबा, सरकारी, कामकाज, नेता, शासन करना, तत्व-ज्ञानी, राजनीतिक-शास्त्र और घुटना ।

ग्यारहवां भाव – लाभ, आय और बड़े भाई-बहिन, कॉमर्स, टांग (घुटने से नीचे, पैर से ऊपर)।

बारहवां भाव – नुकसान, खर्चे, बुरी, आदतें, दूर की यात्रा, विदेश यात्रा, चोरी, मेहमान, पूंजी विनियोग, पैर, और विदेशी भाषा।

कुर्बानी

दुश्मनों से मारे हुए कुर्बानी मन्दा असर होने के वक्त ग्रहों की त्याग के बकरे यानि असली ग्रह की अपनी जगह की बजाए किसी दूसरे ग्रह की हालत खराब हो जाए या वह अपनी जगह दूसरे ग्रह को मरवा जाए ।

शनि – दुश्मन ग्रहों के बचाव के लिए शनि अपनी जान बचाने के लिए अपने पास राहू-केतू ऐसे ग्रह एजेन्ट बनाए हुए है कि वह शनि की जगह किसी दूसरे की कुर्बानी दिला देते है। राहू केतू इकट्ठे बनावटी शुक्र माना है, इसलिए जब शनि को जब सूर्य का टकराव तंग करे, तो वह खुद अपनी जगह शुक्र औरत को मरवा देता है या सूर्य शनि के झगडे में औरत मारी जाएगी या ऐसे कुण्डली वाले की औरत पर इन दोनो ग्रहों की दुश्मनी का असर जा पहुँचेगा। न सूर्य सुख बरबाद होगा न ही शनि क्योंकि वह आपस में बाप बेटा है।

उदाहरण – सूर्य खाना नं-6, शनि खाना नं-12 हो तो औरत पर औरत मरती जाए।

बुध – बुध ने भी अपने बचाव के लिए शुक्र के साथ दोस्ती रखी है। वह भी अपने दोस्त शुक्र को ही बलाएँ डाला करता है।

मंगल – मंगल बद ‘भाई’ अपनी बला केतू ‘लड़का’ पर डालता है। शेर से कुत्ते को मरवा देगा।

उदाहरर्णाथ – सूर्य खाना नं-6 मंगल खाना नं-10 लड़के पर लडका ‘केतू’ मरता जाए। भाई भतीजे को मरवाए।

शुक्र – स्त्री शैतान स्वभाव खुद अपनी बला चन्द्र यानि कुंडली वाले की माता पर जा धकेलेगी। मसलन चन्द्र शुक्र आमने-सामने सो मात अंधी हो जाए।

बृहस्पति – बृहस्पति ने अपने साथी केतू को ही कुर्बानी के लिए रखा है।

सूर्य – अपनी मुसीबत के वक्त केतू पर नजला ‘अपना मन्दा असर डाल देगा’।

चन्द्र – अपने दोस्त ग्रहों पर अपनी बला डालेगा। बृहस्पति सूर्य और मंगल की कुर्बानी करेगा।

राहू, केतू – खुद ही अपना पाप निभाएँगे और अपनी संबंधित वस्तुएँ कारोबार या रिश्ता संबंधी राहू या केतू पर मुसीबत का भूचाल पैदा करेंगे। तो गरीब केतू को मरवाते हैं।

धर्म स्थान

धर्म स्थान, पूजा पाठ या इष्ट सिद्धि के लिए पवित्र जगह से आशय होगी, मुसलमान के लिए मस्जिद, सिख के लिए गुरूद्वारा, ईसाइयों के लिए गिरिजाघर और हिन्दुओं के लिए धर्म-मन्दिर या जिस धर्म और जगह में किसी प्राणी का विश्वास हो उसके लिए धर्म वही स्थान होगा। वहाँ रहने वाला कोई भी क्यों न हो या जिसे किसी ऐसे दुनिया की जगह पर विश्वास न हो, उसके लिए चलता हुआ दरिया नदी या शनिश्चर धर्मस्थान का काम करेगा।

नोट – सूर्य मंगल और बृहस्पति इन्साफ के स्वामी होते हुए दूसरों की तो मदद करेंगे और एक को दूसरे पर गलत ज्यादती करते नही देख सकते, मगर जब खुद ही मुसीबत में हो, जो गरीब केतू को मरवाते है।

स्थित कायम ग्रह

जो ग्रह हर तरह से ठीक और अपना असर बगैर किसी दुश्मन ग्रह के असर की मिलावट के साफ-साफ और कायम रख रहा हो यानि राशि की मिल्कियत ‘स्वामित्व’ ऊँच-नीच या पक्के घर या दृष्टि वगैरा किसी तरह से भी दुश्मन का असर न मिल रहा हो, और न हीं वह किसी दुश्मन ग्रह का साथी बन रहा हो, तो वह कायम ग्रह कहलाएगा।

लाल किताब द्वारा वर्जित

1. चन्द्र पहले खाने में हो तो दूध का दान नहीं करना चाहिए।

2. चन्द्र खाना नं 2 में हो तो ऐसा व्यक्ति अगर घन्टियां बजाकर पूजा करेगा तो उसकी संतान पर बहुत अशुभ प्रभाव होगा। |

3. चन्द्र खाना नं 3 में हो तो पानी का दान नहीं करना चाहिए यानि आम लोगो के लिए मुफ्त में तालाब कुआं, बावड़ी, प्याऊ बनवाएगा तो वह संतानहीन होगा। और उसके परिवार में आसामयिक मृत्यु होती रहेगी।

4. चन्द्र अगर चौथे खाने में और दूध बेचने का कार्य करे तो ऐसा व्यक्ति निर्धन हो जाएगा।

5. चन्द्र अगर दसवें खाने में हो तो ऐसे व्यक्ति को रात में दूध नहीं पीना चाहिए और डाक्टरी या वैद्य का काम नहीं करना चाहिए।

6. चन्द्र खाना नं 11 वाले को प्रभात समय न दान लेना चाहिए और न ही करना चाहिए दान लेने का मतलब है ऐसे व्यक्ति को अपनी शादी के फेरे प्रभात के समय नही लेना चाहिए और न ही अपने संतान के चाहे लड़के की शादी हो या लड़की की।

7. यदि चन्द्र 12 में हो तो ऐसे व्यक्ति को साधुओं को भोजन नहीं कराना चाहिए और अपने माता-पिता से कोई सम्पत्ति नहीं लेनी चाहिए। यदि ऐसा व्यक्ति अपने माता-पिता से सम्पत्ति लेता है या उसे मिल जाती है तो वह सारी उजड़ जाएगी। मन्दिर, गुरुद्वारे, मस्जिद, और चर्च या किसी भी ऐसे धर्म स्थान पर जो कि निर्माणधीन हो उसमें दान नहीं करना चाहिए और न ही कोई धर्म स्थान बनवाना चाहिए। किसी को भी निशुल्क शिक्षा नहीं देनी चाहिए।

8. बृहस्पति 2,4,5 खाने में हो तो घर में मन्दिर नहीं बनाना चाहिए और पूजा भी नहीं करनी चाहिए, ठोस मूर्तियाँ नहीं रखनी चाहिए कागज की फोटो का वहम नहीं है।

9. बृहस्पति सातवें घर में हो तो कपड़े दान नहीं करने चाहिए घर में मन्दिर बनाकर पूजा नहीं करनी चाहिए साधु सन्तों से दूर रहना चाहिए। और किसी को मुफ्त में शिक्षा भी नहीं देनी चाहिए।

10. बृहस्पति पांचवे घर में हो तो लंगर, प्रसाद नहीं खाना चाहिए। घर में मन्दिर बनाकर घंटी बजाकर पूजा भी नहीं करनी चाहिए। साधू संतो से दूर रहना चाहिए।

11. बृहस्पति दसवें खाने में हो तो किसी की भला नहीं करना चाहिए। धर्मस्थान भी नहीं बनवाना चाहिए।

12. सूर्य यदि सातवें खाने मे हो तो प्रातः काल और सांय काल में दान नहीं करना चाहिए।

13. शनि आठवें खाने में हो तो धर्मशाला सराय आदि नहीं बनवाने चाहिए।

लाल किताब के उपाय

  1. लाल किताब से फलादेश करने की विधि
  2. जो नजर आता है वो होता नहीं
  3. लाल किताब किताब की दशाएं
  4. लाल किताब शब्दकोष
  5. लाल किताब के अनुसार पूजा कैसे करनी चाहिए ?
  6. लाल किताब के अनुसार पितृ ऋण
  7. लाल किताब के अचूक उपाय
  8. लाल किताब के अनुसार बृहस्पति का फलादेश और उपाय
  9. लाल किताब के अनुसार सूर्य का फलादेश और उपाय
  10. लाल किताब के अनुसार चंद्र का फलादेश और उपाय
  11. लाल किताब के अनुसार मंगल का फलादेश और उपाय
  12. लाल किताब के अनुसार बुध का फलादेश और उपाय
  13. लाल किताब के अनुसार शुक्र का फलादेश और उपाय
  14. लाल किताब के अनुसार शनि का फलादेश और उपाय
  15. लाल किताब के अनुसार राहू का फलादेश और उपाय
  16. लाल किताब के अनुसार केतू का फलादेश और उपाय
  17. लाल किताब के अनुसार दो ग्रहों का फलादेश और उपाय

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