लाल किताब के अनुसार पितृ ऋण
‘करे कोई भरे कोई’ को ‘पितृ-ऋण’ कहते हैं। अपने पूवर्जो के बुरे कर्मों का फल उसके वंशज में किसी एक को भोगना पड़ता है ।
1. सूर्य का पितृ ऋण – यदि शुक्र, शनि भाव 5 में हों तो सूर्य का पितृ ऋण होता है। जैसे – पुराने रीति-रिवाजों का अपमान करना, छत में से रोशनी करना, दिल की बीमारी होना।
निशानियाँ – नास्तिक होना। बुजुर्गों के रीति-रिवाज को न मानना ।
उपाय – कुल खानदान खून संबंधी हरेक सदस्य के साथ मिलकर सूर्य यज्ञ करना ।
2. चन्द्र का पितृ ऋण – केतु खाना नं0 4 में हो तो चन्द्र ऋण होता है। माता दुःखी रहना, माता का निरादर करना, किसी गन्दी जगह पर पूजा स्थान बनाना, कुएं का सूख जाना आदि ।
निशानियाँ – गन्दी जगह पर पूजा स्थान बनाना। सेहत अच्छी होते हुए भी हिम्मत जबाब दे दे।
उपाय – कुल खानदान, खून संबंधी बराबर-बराबर की चांदी लेकर सोमवार को चलते पानी में डालना।
3. मंगल का पितृ ऋण – इसका पितृ यदि 1, 8 में हो तो मंगल का पितृ ऋण होता है। मित्र के साथ गद्दारी करना, रिश्तेदारों के साथ मिलने में घृणा होना, सब कुछ मिलने के बाद मिट जाना या नुकसान हो जाना आदि ।
निशानियाँ – बिरादरी के मिलाप में नफरत करना।
उपाय – कुल खानदान, खून संबंधी से पैसे इकट्ठे करके उन पैसों से दवाइयां ले करके ऐसे हकीम या डॉक्टर को दें जो मुफ्त में लोगो का इलाज करता हो। ये याद रखें कि आप उस जगह या उस डॉक्टर से अपना इलाज न करवायें ।
4. बुध का पितृ ऋण – यदि चंद्र भाव 3 और 6 में हो तो बुध का पितृ ऋण होता है। किसी की लड़की या बहिन की हत्या या धोखा देना।
निशानियां – आय कम, खर्चा ज़्यादा होना। छोटे बच्चों पर जुल्म करना ।
उपाय – कुल खानदान, खून संबंधी से पैसे इकट्ठे करके बुधवार के दिन देसी घी का हल्वा-पूरी बना कर नौ साल से छोटी कन्याओं में दक्षिणा देकर बांटें।
5. बृहस्पति का पितृ ऋण – शुक्र, बुध और राहु भाव नं0 2,5,9,12 में हों तो बृहस्पति का पितृ ऋण होता है।
निशानियां – पुरोहित का बदलना, धर्म स्थान बदलना, बृहस्पति पितृ ऋण की निशानी है।

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उपाय – इसका उपाय है कुल खानदान, खून संबंधी सबसे कुछ न कुछ पैसा लेकर धर्म स्थान में एक ही दफा दें।
6. शुक्र का पितृ ऋण – यदि सूर्य, राहु, केतु भाव नं0 2 और 7 में हो तो शुक्र-ऋण होता है। पारिवारिक मार-पीट, गर्भवती स्त्री को मारना । निशानियां – खानदान में नफरत रखना, किसी भी खुशी के साथ गम का आना आदि।
उपाय – कुल खानदान, खून संबंधी से बराबर पैसे लेकर सौ गायों को चारा खिलाना एक ही दिन ।
7. शनि का पितृ ऋण – यदि सूर्य, चन्द्र 10 और 11 भाव में हों ।
निशानियां – किसी भी जीव हत्या करना, किसी अनाथ या विधवा का मकान धोखे से लेना, साँप को मारना या मरवाना।
उपाय – कुल खानदान, खून संबंधी से बराबर-बराबर के पैसे लेकर एक ही दिन में सौ मजदूरों को खाना खिलाना।
8. राहु का पितृ ऋण – यदि सूर्य, शुक्र, मंगल 12वें भाव में हो।
कारण – ससुराल वालों को धोखा देना, नानको को धोखा देना।
निशानियां – घर के साथ कब्रिस्तान होना, बड़भूजे की भट्टी का होना, दहलीज़ के नीचे से गंदे पानी का जाना, अचानक धन हानि होना ।
उपाय – कुल खानदान, खून संबंधी से एक-एक नारियल लेकर एक ही दिन एक ही स्थान पर जल में बहायें (चलते पानी में)।
9. केतु का पितृ ऋण – यदि चंद्र, मंगल छठे भाव में हो तब केतु का ऋण होता है।
कारण – कुत्तों को मरवाना, दूसरों की नर-औलाद को नष्ट करना ।
निशानियां – पेशाब की बिमारियां, बच्चों की अचानक मृत्यु, कान की बिमारियां आदि ।
उपाय – कुल खानदान, खून संबंधी से पैसे इकट्ठे करके सौ कुत्तों को एक ही दिन खाना खिलाना।
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