मिथुन लग्न का फलादेश
मिथुन लग्न का फलादेश मिथुन लग्न वाले जातक बुद्धिमान, वाक्पटु और कलात्मक स्वभाव के होते हैं, जो बुध ग्रह के प्रभाव के कारण बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं। वे जिज्ञासु, उत्साही और सामाजिक होते हैं। संचार के क्षेत्र में Read more
मिथुन लग्न का फलादेश मिथुन लग्न वाले जातक बुद्धिमान, वाक्पटु और कलात्मक स्वभाव के होते हैं, जो बुध ग्रह के प्रभाव के कारण बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं। वे जिज्ञासु, उत्साही और सामाजिक होते हैं। संचार के क्षेत्र में Read more
वृष लग्न का फलादेश वृष लग्न के जातक साहसी, धैर्यवान और व्यावहारिक होते हैं, जो भौतिक सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं। इनके व्यक्तित्व में आकर्षण और वाक्पटुता होती है और ये कला, संगीत और साहित्य में रुचि रखते हैं। ये Read more
मेष लग्न का फलादेश मेष लग्न वाले जातक साहसी, अभिमानी और स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं, जो किसी भी पहल को करने के लिए तैयार रहते हैं। उनका स्वभाव स्पष्टवादी और जिद्दी हो सकता है, लेकिन वे दयालु और Read more
कुंडली में राहु का फलादेश 1. राहु राजनीति, फिल्म लाईन में बहुत महत्वपूर्ण ग्रह है। 2. राहु योगों और दुर्योगों के प्रभाव को बढा देता है। 3. किसी जातक के लिए राहु बुध, शुक्र, शनि की राशियों में बैठा हो Read more
1. जो भाव अपने स्वामी द्वारा दृष्ट हो तथा उस भाव पर शुभ दृष्टि भी हो तो स्वामी द्वारा दृष्ट भाव की बहुत वृद्धि होती है। 2. जब किसी शुभ भाव (लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम, दशम) का स्वामी Read more
अमला योग परिभाषा – (1) चन्द्रमा जिस राशि पर बैठा हो, उससे दसवें स्थान पर यदि शुभ ग्रह बैठा हो तो अमला योग होता है। (2) यदि लग्न से दसवें स्थान पर शुभ ग्रह हो तो भी अमला योग माना Read more
कुंडली में सूर्य से बनने वाले योग वासी योग परिभाषा – चन्द्रमा के अतिरिक्त कोई भी ग्रह या कई ग्रह सूर्य से बारहवें स्थान में विद्यमान हों तो वासी योग होता है। फल – वासी योग में जन्म लेने वाला Read more
ज्योतिष शास्त्र में ‘पंच महापुरुष योग’ वर्णित है । इन पाँचों में से कोई एक योग होने पर भी जातक महापुरुष होता है एवं देश-विदेश में कीर्ति लाभ करता है । इन पाँच योगों के नाम हैं-रुचक, भद्र, हंस, मालव्य Read more
मालिका योग परिभाषा – किसी भी भाव से 7 भावों में 7 ग्रह (सू. चं. मं. बु. वृ. शु. श.) हों तो भाव संबंधी मालिका योग होता है । फल – (1) यदि लग्न से लगातार सात भावों में सातों Read more
पापकर्तरी योग परिभाषा – लग्न से दूसरे भाव तथा बारहवें भाव में पाप ग्रह या अशुभ ग्रह स्थित हों तो पापकर्तरी योग बनता है। फल – पापकर्तरी योग में जन्म लेनेवाला व्यक्ति पाप करनेवाला कुचक्र रचने में प्रवीण, भिक्षुक और Read more