प्रेम में असफलता के ज्योतिषीय कारण

प्रेम में सफलता यॉ असफलता के अध्ययन के लिए पचम भाव, पंचमेश और प्रेम के कारक शुक्र का अध्ययन करना चाहिए।

1. पंचम भाव में

  • सौम्य राशि हो
  • शुभ दृष्टि हो
  • शुभ ग्रह स्थित हो
  • शुभ कर्तरी हो

2. पंचमेश

  • सौम्य राशि में हो
  • शुभ भावों में हो (6,8,12 में न हो)
  • केंद्र त्रिकोण के स्वामी के साथ हो जो लग्नेश का मित्र हो
  • शुभ ग्रह के साथ हो
  • शुभ ग्रह से दृष्ट हो
  • शुभ कर्तरी में हो
  • शुक्र से युति हो

3. प्रेम का कारक शुक्र

  • सौम्य राशि में हो
  • शुभ भावों में हो (6,8,12 में न हो)
  • केंद्र त्रिकोण के स्वामी के साथ हो जो लग्नेश का मित्र हो
  • शुभ ग्रह के साथ हो
  • शुभ ग्रह से दृष्ट हो
  • शुभ कर्तरी में हो

4. नवमांश

  • D9 के पंचम में D1 के 6,8,12 की राशि न हो
  • D1 का पंचमेश D9 के केंद्र, त्रिकोण में हो
  • शुक्र अच्छी स्थिति में हो

5. पंचम और सप्तम का सम्बंध भी प्रेम विवाह करवाता है। यदि इस सम्बंध पर गुरु की दृष्टि हो तो जातक का माता पिता की सहमति से प्रेम विवाह करता है। और अगर इस सम्बंध पर शुक्र की दृष्टि हो तो उसकी कामनाएं प्रबल हो जाती हैं और वो माता पिता की सहमति का इंतजार नही करता।

6. यदि शुक्र की दृष्टि पंचम भाव पर पड़ रही हो या वह चंद्रमा को देख रहा हो तो ऐसी दशा में चुपके-चुपके प्यार बढ़ता है।

7. यदि एकादश भाव पापी ग्रहों के प्रभाव में होता है तब भी प्रेमियों का मिलन नहीं हो पाता।

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8. दशा भी अनुकूल होनी चाहिए।

प्रेम में असफलता के ज्योतिषीय कारण, prem men asaphalata

जातक की मानसिकता का अध्ययन

प्रेम में सफलता यॉ असफलता के अध्ययन के लिए जातक की मानसिकता का अध्ययन करना भी जरूरी है। अगर जातक ढृढ मानसिकता का है और उसका मन सात्विक है तो उसका प्रेम सफल होने की ज्यादा सम्भावना रहती है। जातक की मनःस्थिति जानने के लिए हम चंद्रमा का अध्ययन करते है।

1. अगर चंद्र

  • स्थिर राशि (2,5,8,11) में हो तो जातक ढृढ मानसिकता का होता है
  • चर राशि (1,4,7,10) में हो तो चंचल मानसिकता का होता है
  • द्विस्वभाव राशि (3,6,9,12) में हो तो जातक निर्णयहीनता की स्थिति में रहता है
  • शुभ चंद्र ढृढ मानसिकता, अशुभ चंद्र कमजोर मानसिकता का द्योतक है
  • चंद्र का 4/8/12 भाव में होना कमजोर मानसिकता का द्योतक है

2. चंद्र की युति दृष्टि

  • चंद्र की नैसर्गिक शुभ ग्रह से युति, दृष्टि और कर्तरि सात्विक मानसिकता की द्योतक है। ऐसे जातक निस्वार्थ प्रेम करते हैं।
  • चंद्र की मंगल से युति, दृष्टि नोकझोंक और लडाई झगडे की द्योतक है।
  • चंद्र की सूर्य से युति, दृष्टि सम्बंध विच्छेद की द्योतक है।
  • चंद्र की शनि से युति, दृष्टि पाप, वहम, गलतफहमी की द्योतक है।
  • शनिवत राहु कुजवत केतु।

सारांश

पंचम भाव, पंचमेश और शुक्र पर शुभ ग्रहों के प्रभाव प्रेम में सफलता दिलाता है। जबकि पंचम भाव पर राहु, केतु या शनि का प्रभाव, कमजोर शुक्र धोखे, असफलता या ब्रेकअप की संभावना बढ़ती है।

  • यदि पंचम भाव, पंचमेश या शुक्र पर राहु-केतु का प्रभाव प्रेम में बार-बार धोखा (Betrayal) और भ्रम पैदा करता है।
  • यदि इन सब पर शनि का प्रभाव हो तो रिश्ता ठंडा पड़ जाता है या लंबे समय तक नहीं चलता।
  • चंद्रमा पर पाप प्रभाव (राहु-केतु-शनि) मन को अस्थिर करता है।
  • मंगल-शुक्र की युति रिश्ते में आकर्षण तो लाती है, लेकिन यदि पीड़ित हो तो यह कलह और असफलता का कारण बनती है।

प्रेम में सफलता के लिए ज्योतिषीय उपाय

1. यदि शुक्र कमजोर हो तो उसे बलवान करने के उपाय करने चाहिए। इसमें ओपल या हीरा धारण करना, सफेद कपड़े पहनना, और शुक्र मंत्र का जाप करना आदि शामिल है।

2. यदि राहु-केतु/शनि के प्रभाव के कारण समस्या हो रही हो तो इनको शांत करने के उपाय करने चाहिए। इसमें शिवजी की आराधना करना, हनुमान चालीसा का पाठ करना, और जरूरतमंदों को दान देना आदि शामिल है ।

3. पंचमेश के मंत्रों का जाप करना और उसे बलवान करने के लिए संबंधित रत्न पहनना चाहिए।


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