ग्रह दोष दूर करने के उपाय

कुंडली में जो ग्रह पीडादायक हों उस ग्रह को शांत (कमजोर) करने के उपाय करने चाहिए और जो ग्रह शुभ फलदायक हों उनको बलवान करने के उपाय करने चाहिए। सामान्यतः शनि, राहु, केतु और मंगल पाप ग्रह हैं।  ये अक्सर जातक को पीडा ही पहुचाते हैं।  अतः प्राय: इनको शांत ही किया जाता है।  

यहॉ ये बात ध्यान देने योग्य है कि ग्रह शांत करने से कमजोर होता है, इसलिए अगर ग्रह शुभ फालदायक हुआ तो उसके शुभ फल भी कम हो जाएंगे।  

इसलिये हमें कोई भी उपाय करने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना है कि ग्रह शुभ फल देगा कि अशुभ फल।  जैसे :-

  • लग्नेश सदा जातक के लिए शुभ फलदायक होता है चाहे वो शनि यॉ मंगल ही क्यों ना हो।  इसलिए लग्नेश को कभी भी शांत नहीं करना है, उसे हमेशा बलवान ही करना है।
  • कुंडली के योगकारक ग्रह (जैसे सिंह लग्न का मंगल) को कभी शांत नही करना है उसे हमेशा बलवान ही करना है यॉ उससे कोई छेड-छाड नही करनी है।
  • अगर राहु यॉ केतु कुंडली के योगकारक ग्रह हों (जो बहुत कम होता है) तो उन्हे शांत नही करना है।
  • जातक जिस ग्रह के कारकत्व का कार्य कर रहा है उसको शांत नहीं करना चाहिए।  जैसे सामान्यतः जातक को राहु पीडा ही देता है और उनके लिए उसे शांत ही करना पडता है।  लेकिन यही राहु राजनिति, फिल्म लाईन और समग्लिंग का कारक ग्रह है अतः इस प्रकार के कार्य करने वाले जातकों में इसे शांत नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहों के उपाय हमेंशा दशा-अंतर्दशा के समय ही करने चाहिए।  शनि की साढे साती के समय भी शनि को शांत करने के उपाय करने चाहिए।  

इसे और अच्छी तरह समझने के लिए एक उदाहरण देता हूँ जैसे मान लो जातक की कुंडली में गुरु-चंडाल दोष है।  ऐसे में अगर गुरु यॉ राहु की दशा यॉ अंतरदशा में यदि जातक को समस्याएं हो रही हैं तो यहॉ हम गुरु को बलवान करने के उपाय करेंगे और राहु को शांत करने के उपाय करेंगे क्योंकि यहॉ राहु पीडादायक ग्रह है और गुरु पीडित।

अब कुछ लोग यह सोच सकते हैं कि गुरु तो हमेंशा शुभफल ही करता है भला उसको शांत करने की क्या जरुरत?

बात भी सही है लेकिन वो ये भूल जाते है कि गुरु जैसा शुभ ग्रह भी अनिष्ट फल दे सकता यदि वह अष्टमेंश हो और तब उसको भी शांत करने की आवश्यकता पड जाती है।

आईए अब देखते हैं कि ग्रह को कैसे शांत किया जाता है और कैसे बलवान किया जाता है :-

1. ग्रह उसका रत्न पहनने और उसकी वस्तुएं प्रयोग करने से बलवान होता है।  जैसे किसी जातक का सूर्य कमजोर है तो उसे

  • सूर्य का रत्न मणिक पहनना चाहिए
  • सुनहरी रंग का अधिक प्रयोग करना चाहिये
  • सूर्य की वस्तुएं जैसे गेंहू, गुड आदि का प्रयोग अधिक करना चाहिये

2. ग्रह उसकी वस्तुओं का दान करने से शांत होता है।  जैसे किसी जातक का शनि पीडा दे रहा है तो उसे तेल, लोहा, काले वस्त्र आदि का दान करना चाहिए।

3. ग्रह उसकी उपासना करने से प्रसन्न हो जाता है।  इसलिए पूजा और मंत्र जप सब के लिए लाभकारी है।  

सूर्य जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

सूर्य ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करें और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।

2. सूर्य देव के मंत्रों जैसे “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” या गायत्री मंत्र का जाप करें।

3. नियमित रूप से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

4. रविवार का व्रत रखें,।

5. सूर्य को पिता का कारक माना जाता है। पिता व बड़ों का सम्मान करें।

सूर्य ग्रह को शांत करने के उपाय :-

1. तांबा, गेहूं, गुड़ या लाल कपड़े का दान करें।

2. गाय को पहली रोटी और गुड़ खिलाएं।

3. रविवार के दिन लाल चींटियों को आटा खिलाएं।

ये उपाय सूर्य के नकारात्मक प्रभाव कम करने में मदद करते हैं।

सूर्य ग्रह को बलवान करने के उपाय :- 

1. माणिक्य अथवा उसके उपरत्नों में से किसी को अंगूठी में जड़वाकर पहने। माणिक्य को सोने की अंगूठी में जड़वाकर दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली में धारण किए जाने का प्रावधान है।

माणिक्य का वजन कम-से-कम 3 रत्ती और सोने का वजन कम-से-कम 5 रत्ती होना चाहिए। यह अंगूठी रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ने पर विधिवत पूजा अनुष्ठान और माणिक्य में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद धारण की जानी चाहिए। अंगूठी धारण करने का उपयुक्त समय दोपहर से पहले का होता है। माणिक्य के उपरत्न भी पहने जा सकते हैं।

2. रविवार के दिन दाहिने हाथ में तांबे का कड़ा धारण करना शुभ माना जाता है।

3. भोजन में गुड़, गेहू के आटे का सेवन अधिक करें।

4. जीवन में सुनहरी रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग)।

चंद्र जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

चंद्र ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. सोमवार को शिवलिंग पर जल, दूध और सफेद फूल चढ़ाएं। शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें। सोमवार का उपवास रखना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

 2. “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का जाप करें। इसके अलावा चंद्र के लघु मंत्र “ॐ सों सोमाय नमः” का जप भी किया जा सकता है।

3. अपनी माता या बुजुर्ग महिलाओं का आदर करें और उनका आशीर्वाद लें।

4. ध्यान और योग करें, और समय पर सोएं।

5. पानी बर्बाद बिल्कुल न करें।

चंद्र ग्रह को शांत करने के उपाय :-

1. सोमवार के दिन दूध, चावल, दही, चांदी, सफेद वस्त्र, चीनी, कपूर आदि का दान करें।

2. रात को पानी का बर्तन सिरहाने रखकर सुबह उसे पौधों में डाल दें।

चंद्र ग्रह को बलवान करने के उपाय :-

1. यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में चंद्र बलहीन हो तो उसे चांदी की अंगूठी में मोती या चंद्रमणि पहनना भी उपयुक्त रहता है। जातक मोती की माला भी धारण कर सकता है।

मोती या चंद्रमणि की अंगूठी 4 रत्ती या इससे अधिक मात्रा के मोती की होनी अभीष्ट है। जातक इस अंगूठी को पुण्य, रोहिणी, हस्त या श्रवण नक्षत्रों के काल में पड़ने वाले सोमवार को विधिपूर्वक पूजा या अनुष्ठान करवाकर धारण कर सकता है। अंगूठी तर्जनी अंगूली या कनिष्ठिका अंगुली में ही (बाएं हाथ की) धारण करना चाहिए। चंद्र के लिए उत्पन्न निमरु, शंख जोड़, सफेद अकीक व गौरी नग आदि भी पहने जा सकते हैं।

2. चांदी के गिलास में पानी पिएं या चांदी का कड़ा/चेन धारण करें।

3. जीवन में सफेद रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग) ।

4. सफेद वस्तुओं (चावल, दूध आदि) का सेवन अधिक करें।

ग्रह दोष दूर करने के उपाय, grah dosh dur karane ke upaay

मंगल जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

मंगल ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. मंगलवार के दिन व्रत रखें। व्रत के दिन एक समय भोजन करें (बिना नमक का) । गुड़ से बने व्यंजनों का सेवन करें। और हनुमान जी के मंदिर में जाकर लाल फूल चढ़ाएं।

2. मंगल के बीज मंत्र – “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” या “ॐ भौं भौमाय नमः” का जाप करें।

3. प्रतिदिन या हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना मंगल के नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है।

4. मंगल की शांति के लिए चंदन, बरियारा के बीज, लाल फूल, और जटामांसी के जल से स्नान करना उत्तम बताया गया है।

मंगल ग्रह को शांत करने के उपाय :- लाल मसूर की दाल, गुड़, तांबा, सौंफ और लाल फूल जैसी वस्तुओं का दान करें।

मंगल ग्रह को बलवान करने के उपाय :-

1. जातक को कम-से-कम 6 रत्ती वजन के सोने की अंगूठी में 6 रत्ती वजन का मूंगा जड़वाकर उस मंगलवार को विधिवत पूजा और प्राण-प्रतिष्ठा कराकर पहनना चाहिए, जब चंद्र मेष राशि पर संचरण कर रहा हो।

इसके अलावा मूंगा पहनना उस मंगलवार को भी शुभ रहता है, जब मंगल मकर राशि में विचरण कर रहा हो और चंद्र भी उसी राशि में हो अथवा चंद्र-मंगल योग बनाने वाली अन्य स्थितियों मे बैठा हो। मूंगा पीला व लाल वर्ण का होना चाहिए।

यदि मूंगा न पहन सकें तो लाल अकीक भी धारण किया जा सकता है। अंगूठी सोने की न बनवा सकें तो तांबें की अंगूठी में भी मूंगा अथवा उसका उपरत्न पहनना श्रेयस्कर रहता है। मूंगे के उपरत्नों में संगमूशी अथवा नाग जिह्वा (जड़ी) धारण किए जा सकते हैं।         

2. जीवन में लाल रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग) ।

3. लाल मसूर की दाल, गुड़, तांबा, सौंफ, और लाल फूल जैसी वस्तुओं का प्रयोग करें। 

बुध जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

बुध ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. प्रतिदिन बुध बीज मंत्र “ॐ बुं बुधाय नमः” का जाप करें।

2. बुधवार का व्रत रखें, गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं, और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। बुधवार के दिन मांस-मदिरा के सेवन से बचें।

3. घर में तुलसी का पौधा लगाएं और नित्य जल अर्पित करें (रविवार छोड़कर)। घर में कटीले पौधे या झाड़ियाँ न लगाएं।

4. बहन, बुआ, साली या बेटी के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करें।

5. अपनी वाणी में मधुरता लाएं और अधिक न चिल्लाएं।

बुध ग्रह को शांत करने के उपाय :-

1. हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र, हरे फल, कांसे के बर्तन या हरी चूड़ियां दान करें।

2. गाय को हरी घास या चारा खिलाएं।

बुध ग्रह को बलवान करने के उपाय :-

1. ज्योतिष विज्ञान में बुध ग्रह को बलवान करने के लिए पन्ना या उसके उपरत्नों में से किसी को अंगूठी में जड़वाकर पहनने की सलाह दी गई है। इसके लिए कम-से-कम 6 रत्ती सोने की अंगूठी में कम-से-कम 3 रत्ती का पन्ना, बुधवार के दिन आश्लेषा, ज्येष्ठा अथवा रेवती नक्षत्रों में से किसी में बुध के संचरण काल में पहना जाना चाहिए ।

पन्ना जड़ी अंगूठी को कनिष्ठिका अंगुली में धारण किया जाना चाहिए। अंगूठी धारण करने से पहले पन्ना में बुध की प्राण प्रतिष्ठा और विधिवत पूजा करा ली जानी चाहिए।

पन्ना न मिलने पर टोड़ा वैरुज, पन्नी, मरगज अथवा पित्तमणि आदि उपरत्नों में से किसी को अंगूठी में जड़वाकर पहना जा सकता है।

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2. जीवन में हरे रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग) ।

3. बुध की वस्तुओं जैसे हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र, हरे फल, कांसे के बर्तन आदि का प्रयोग अधिक करें।

गुरु जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

गुरु ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. गुरुवार का व्रत रखें, विष्णु भगवान की पूजा करें, और हल्दी या केसर का तिलक लगाएं तथा “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी है।

2. गुरु, पुरोहित, शिक्षकों और बुजुर्गों का सम्मान करें।

गुरु ग्रह की शांति के उपाय :- किसी मंदिर के गरीब लेकिन सदाचारी पुजारी को चने की दाल, हल्दी, केसर, पीले वस्त्र, मिठाई, और स्वर्ण का दान करें।  

गुरु ग्रह को बलवान करने के उपाय :-

1. गुरु ग्रह को बल प्रदान करने के लिए सोने या चांदी की अंगूठी में पुखराज जड़वाकर शुभ मुहुर्त में विधिपूर्वक पूजा अनुष्ठान व मंत्रजाप के पश्चात धारण करें। यदि जातक ब्राह्मण समुदाय का हो तो उसे सोने की अंगूठी में पीला पुखराज धारण करना चाहिए।

अंगूठी में सोने का वजन कम-से-कम सात रत्ती और पुखराज का वजन कम-से-कम 4 रत्ती का होना श्रेयस्कर रहता है। पुखराज के स्थान पर उसके उपरत्न-सुनैला, कहरुवा, सोनामक्खी, संगघिया कपूर अथवा पीला अकीक प्रयोग कर सकते हैं।

2. पीले रंग के वस्त्र (सूती) धारण करना भी शुभ रहता हैं ।

3. नहाने के पानी में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर स्नान करें।

4. जीवन में पीले रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग) ।

शुक्र जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

शुक्र ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. शुक्रवार का व्रत रखें। लक्ष्मी जी की उपासना करें और श्री सूक्त का पाठ करें।

2. ‘ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः’ या ‘ॐ शुं शुक्राय नमः’ का स्फटिक माला से जाप करें।

3. कन्याओं और महिलाओं का सम्मान करें, अपने जीवनसाथी के प्रति प्रेमपूर्ण रहें।

शुक्र ग्रह को शांत करने के उपाय :-

1. किसी मंदिर के गरीब लेकिन सदाचारी पुजारी की पत्नि को सफेद वस्तुएं जैसे दूध, दही, घी, चावल, सफेद मिठाई, सुगंधित इत्र, और चांदी का दान करें।

 2. शुक्रवार को सफेद गाय को आटा या दही-चावल खिलाएं।      

शुक्र ग्रह को बलवान करने के उपाय :-

1. यदि कुंडली में शुक्र कमजोर हो तो ज्योतिर्विद शुक्र के रत्न ‘हीरे’ को सोने की अंगूठी में जड़वाकर पहनने की सलाह देते हैं। हीरा वजन में कम-से-कम 1 रत्ती का तथा सोना 7 रत्ती वजन का शुभ और उपयुक्त माना जाता है।

इस अंगूठी को शुक्रवार के दिन पुष्य नक्षत्र में हीरे में शुक्र की प्राण-प्रतिष्ठा कराकर तर्जनी अंगुली में धारण करना चाहिए।

जो जातक हीरे की अंगूठी धारण करने में असमर्थ हो, वे कासला, दतला, कुरंज या तुरमूली धारण कर सकते हैं। ये उपरत्न हीरे जितने प्रभावशाली तो नहीं होते लेकिन काम चला सकते हैं ।

2. हमेशा साफ कपड़े पहनें, स्वच्छता बनाए रखें और परफ्यूम का प्रयोग करें।

3. जीवन में सफेद रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग) ।

शनि जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

शनि ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. हनुमान जी की पूजा करें।

2. शनि देव को प्रसन्न करने के लिए “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।

3. शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनिदेव का ध्यान करें और 7 बार परिक्रमा करें।

4. घर में या घर के पास शमी का पेड़ लगाएं और शनिवार को उसकी पूजा करें।

5. नशीले पदार्थ ऐवम मांस मदिरा के सेवन से बचें।

6. चमडे का सामान जैसे बैल्ट, पर्स, जूता आदि न प्रयोग करें।

7. अपने घरेलू नौकरों, अधीनस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और सफाईकर्मी आदि के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाएं।

शनि ग्रह को शांत करने के उपाय :-

1. शनिवार को काले कपड़े, काले तिल, उड़द की दाल, लोहे की वस्तुएं, छाता या जूते-चप्पल जरूरतमंदों को दान करें।

2. जरुरतमन्द, गरीब, मजदूर लोगों की मदद करें और शनिवार को नियमित रूप से तेल का दान करें।

3. गरीबों और दलितों को शनिवार के दिन नमकीन भोजन और सलेटी रंग के वस्त्र दान दें।

4. शनिवार के दिन एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखकर, उस तेल को किसी शनि मंदिर में या निर्धन को दान कर दें।

शनि ग्रह को बलवान करने के उपाय :- 

1. शनि को बलवान करने के लिए नीलम (कम से कम 4 रत्ती का) अथवा उसका उपरत्न जमुनिया अथवा मीली भी धारण किया जा सकता है। उपरत्न नीलम जितने प्रभावशाली तो नहीं होते लेकिन सस्ते मिल जाने के कारण नीलम की खरीद सामर्थ्य न होने पर पहने जा सकते हैं।

नीलम को कम से कम 8 रत्ती वजन की सोने/लोहे की अंगूठी में जड़वाकर उसे धारण किया जा सकता है। अंगूठी शनिवार के दिन उत्तराषाढ़, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वभाद्रपद, चित्रा, स्वाति अथवा विशाखा नक्षत्र पड़ने पर विधिवत् पूजा-अनुष्ठान कराकर ही पहननी चाहिए।

2. जीवन में काले रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग) ।  

राहु जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

राहु ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. प्रतिदिन सुबह-शाम ‘ॐ रां राहवे नमः’ या ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ मंत्र का जाप करें।

2. शनिवार को भैरव बाबा की पूजा करें।

3. प्रतिदिन गोमूत्र मिलाकर स्नान करें।

4. मांस-मदिरा से परहेज करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

5. सुबह ब्रश करने के बाद तुलसी के पत्ते खाना भी लाभकारी पाया गया है।

6. घर में कबाड़ जमा न होने दें और सूर्य की रोशनी घर में आने दें। फटे-पुराने कपड़े या फटे मोज़े न पहनें।

राहु ग्रह को शांत करने के उपाय :-

राहु ग्रह को शांत करने के लिए काले तिल, नीले/काले कपड़े, सरसों के तेल का दान सबसे प्रभावी उपाय हैं।

राहु ग्रह को बलवान करने के उपाय :-

1. राहु ग्रह को बलवान करने के लिए गोमेद जड़ित अंगूठी पहनना लाभदायक रहता है। अंगूठी पंचधातु या लोहे से बनवाई जानी चाहिए जिसमें गोमेद वजन 4 रत्ती या उससे अधिक और धातु का वजन 7 रत्ती का होना चाहिए । इसे विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान कराकर आर्द्रा, शतिभिषा अथवा स्वाति नक्षत्रों के काल में धारण किया जाना चाहिए।

2. जीवन में नीले रंग का प्रयोग अधिक करें (जैसे – कपडे, पर्दे, वाहन का रंग, कमरों का रंग, खाने-पीने की वस्तुओं का रंग) ।  

केतु जनित ग्रह दोष दूर करने के उपाय

केतु ग्रह के सामान्य उपाय :-

1. गणेश जी की नियमित पूजा करें।

2. प्रतिदिन सुबह “ॐ कें केतवे नमः” या “ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नमः” का जाप करें।

3. पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें।

4. अपने पड़ोसियों और घर के नौकरों के साथ अच्छा व्यवहार रखें।

5. घर में सकारात्मकता के लिए साफ-सफाई पर ध्यान दें।

केतु ग्रह को शांत करने के उपाय :-

1. बुधवार या शनिवार के दिन काले तिल, ऊनी वस्त्र, नारियल, या कंबल का दान करें।

2. घर की अनावश्यक चीजों का दान कर दें ।

3. कुत्तों (विशेषकर काले-सफेद) रोटी दें।

केतु ग्रह को बलवान करने के उपाय :-

1. केतु ग्रह के प्रभावों को बढाने के लिए लहसुनिया या उसके उपरत्न-फिरोजा, लसनवी, गोदंति, गोदंता आदि का कम-से-कम 4 रत्ती का नग 7 रत्ती पंचधातु की अंगूठी में जड़वाकर अश्विनी, मघा या मूल नक्षत्रों के उदयकाल में विधिवत् पूजा व प्राण-प्रतिष्ठा कराकर पहनना चाहिए।

2. सोने से पहले चांदी के गिलास में पानी भरकर सिराहने रखें और सुबह पी लें।

3. कुत्ता (विशेषकर काले-सफेद) पालें।


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