कुंडली के ग्यारहवें भाव का फलादेश

एकादश भाव लाभ, बड़ा भाई, मित्र, अधिग्रहण, दयनीयता से मुक्ति और प्रसन्नता के लिए होता है। ११ वें भाव पर बुरे प्रभाव होने के फलस्वरूप भाई, मित्र की हानि हो सकती है, धन की हानि हो सकती है, दुःखी और अप्रसन्न समाचार मिल सकता है।

समस्त कुण्डली और पीड़ित ग्रहों को जाँच के बाद ही फल के सही स्वरूप का पता लगाया जा सकता है। कुछ सीमा तक एकादश भाव का सम्बन्ध विवाह से भी होता है।

विभिन्न भावों में एकादशेश के फल

1. प्रथम भाव – जातक एक धनी परिवार में जन्म लेगा। वह काफी धन अर्जित करेगा । लग्न में एकादशेश के बली, मध्यम या कमजोर होने के अनुसार जातक काफी धनी, मध्यम वर्ग या साधारण धनी परिवार में जन्म लेगा ।

2. द्वितीय भाव – जातक अपने बड़े भाइयों के साथ रहेगा। यदि यहाँ पर शुभ ग्रह हों तो सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध होता है। यदि वहाँ पर अशुभ ग्रह हों तो पारिवारिक कष्ट रहता है किन्तु एक साथ रहते हैं। जातक वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और बैंकिंग कारोबार से धन कमाता है।

मित्रों के साथ कारोबार से अच्छा लाभ होगा किन्तु जब अशुभ ग्रह संबंधित हों तो जातक को मित्रों के कारण काफी हानि हो सकती है ।

3. तृतीय भाव – जातक एक नायक या संगीतज्ञ होगा और उससे धन कमाएगा। भाई के माध्यम से भी लाभ का संकेत मिलता है। उसके अनेक मित्र होंगे और उसके पड़ोसी उसकी मदद करेंगे बुरे प्रभावों का विपरीत फल होता है।

4. चतुर्थ भाव – जातक को भू सम्पदा, किराया और भूमि के उत्पादों से लाभ होता है उसकी मां एक सुसंस्कृत और विशिष्ट महिला होगी। वह विभिन्न विषयों में अपनी विद्वत्ता के लिए प्रसिद्ध होगा। वह आराम का जीवन व्यतीत करेगा। उसकी पत्नी अनुरक्त और आकर्षक होगी ।

5. पंचम भाव – जातक के अनेक बच्चे होंगे जो जीवन में सम्पन्न रहेंगे। वह सट्टा से काफी धन अर्जित करेगा। यदि एकादशेश पीड़ित हो तो वह जुआरी होगा और मूर्खता भरे उद्यम में रहेगा।

यदि एकादशेश अच्छी स्थिति में हो तो जातक एक पवित्र व्यक्ति होगा और अनेक दृढ़ प्रतिज्ञ कार्य करेगा जिससे उसकी संम्पन्नता में वृद्धि होगी।

6. छठा भाव – जातक को मामा, मुकदमा और नर्सिंग होम से आय होगी। यदि एकादशेश छठे भाव में पीड़ित हो तो जातक दो व्यक्तियों में झगड़ा लगाने वाला, अन्य के झगड़े में पड़ने वाला और असामाजिक कार्य करने वाला होगा । यदि एकादशेश पर बुरे ग्रहों का प्रभाव हो तो इसी प्रकार के कामों में जातक को हानि हो सकती है ।

7. सप्तम भाव – जातक अनेक बार विवाह करेगा वह विदेश में धन कमाएगा। यदि एकादशेश पर बुरे प्रभाव हों तो जातक बदनाम स्त्रियों के साथ सम्बन्ध रखेगा। वह शरीर का व्यापार करेगा इसी प्रकार का अनैतिक कार्य करेगा । यदि एकादशेश बली हो तो जातक केवल एक बार विवाह करता है किन्तु वह धनी और प्रभावकारी स्त्री होती है।

8. अष्टम भाव – यद्यपि जातक जन्म के समय काफी धनी होता है, फिर भी उसपर अनेक विपदाएँ आती हैं और उसका काफी धन खर्च हो जाता है। वह चोरों, धोखेबाजों और ठगों से पीड़ित होगा । यदि एकादशेश अशुभ नक्षत्र में हो तो जातक भीख मांगकर अपनी जीविका चलाने पर बाध्य हो जाता है।

9. नवम भाव – उसे काफी पैतृक सम्पत्ति विरासत में मिलती है और जीवन में काफी भाग्यशाली होता है। उसके पास अनेक मकान, सवारी और सभी प्रकार के आराम के साधन होंगे। वह धार्मिक विचार वाला होगा और धार्मिक साहित्य का प्रचार करेगा । धर्मार्थ कार्य करेगा और धर्मार्थ संस्थाओं की स्थापना करेगा ।

10. दसम भाव – जातक अपने कारोबार में काफी सफल रहेगा और अच्छा लाभ कमाएगा । उसका बड़ा भाई भी उसके कारोबार में मदद करेगा। वह अपने अध्ययन के लिए पुरस्कार का धन प्राप्त करेगा। ग्रह के शुभ या अशुभ स्वरूप के आधार पर वह उत्तम या घटिया साधनों से धन कमाएगा।

11. एकादश भाव – जातक के अनेक मित्र और बड़े भाई होंगे जो उसके जीवन में उसकी सहायता करेंगे । पत्नी, घर, बच्चों और आराम के साथ जीवन में प्रसन्न रहेगा ।

12. द्वादश भाव – उसे कारोबार से हानि होगी। उसका बड़ा भाई बीमार रहेगा और उसकी बीमारी पर काफी व्यय होगा । जातक के एक बड़े भाई की मृत्यु भी हो सकती है। उससे यदा कदा दण्ड और जुर्माना का भुगतान करना होगा और वह अनेक पारिवारिक जिम्मेदारियों से दबा रहेगा।

ये फल साधारण हैं और अन्य तथ्यों  का अध्ययन किए विना इसे लागू नहीं करना चाहिए।

महत्वपूर्ण योग

1. यदि एकादशेश किसी बुरे नक्षत्र में स्थित हो अर्थात् वहाँ से ३,५ या ७ वें भाव में चन्द्रमा हो तो जातक आर्थिक संकट और दरिद्रता में रहता है।

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2. यदि ११ वें भाव के दोनों और शुभ ग्रह हों या अन्य स्थितियॉ पक्ष में हो तो जातक का बड़ा भाई बलशाली होता है और जातक अपनी माँ के माध्यम से काफी धन कमाएगा।

3. ११ वें भाव में शुभ ग्रह हों तो उस भाव के महत्व में वृद्धि होती है जबकि अशुभ ग्रह इसकी कोटि और मात्रा में कमी लाते हैं।

4. यदि ११ वें भाव में शुभ ग्रह हों तो जातक इमानदारी और उत्तम साधनों से धन प्राप्त करता है। यदि ११ वें भाव में अशुभग्रह हों तो जातक आय के अनुचित और भ्रष्ट साधनों का सहारा लेता है। यदि वहाँ पर शुभ और अशुभ दोनों ही ग्रह हों तो कभी अनुचित और कभी उचित साधनों का सहारा लेगा।

5. यदि ग्यारहवें भाव में बली ग्रह स्थित हों तो जातक के पास सवारियों, बंगला तथा आराम की सभी वस्तुएँ होगी। उसकी पत्नी कुलीन और सुन्दर होगी और अच्छे कपड़ों, भोजन और आमोद की शौकीन होगी।

6. यदि ग्यारहवें भाव में कमजोर अर्थात् ग्रस्त, दबे हुए या ग्रह युद्ध में पराजित या शत्रुवर्ग में स्थित ग्रह हों तो सम्पन्न परिवार में जन्म लेने के वावजूद जातक सब कुछ खो देगा और निरादर के साथ घूमना पड़ेगा।

7. ११ वें भाव में स्थित ग्रह के स्वभाव से लाभ के साधन का संकेत मिलता है।

  • यदि ११ वें भाव में सूर्य हो तो जातक को पैतृक सम्पत्ति मिलती है।
  • यदि चन्द्रमा हो तो मां, समुद्री उत्पादों, मोती, दूध, फार्म, फलों के बाग और मद्यशाला से धन कमाता है।
  • यदि मंगल हो तो फैक्ट्री, मुकदमा, भूमि और किराया तथा स्व परिश्रम से धन कमाता है ।
  • यदि बुध हो तो शिक्षण, लेखन, मित्रों या चाचा के माध्यम से धन कमाता है।
  • यदि वृहस्पति हो तो ज्ञान धर्म, साहित्य के माध्यम से; सम्पन्न पुत्रों के माध्यम से धन कमाता है।
  • यदि शुक्र हो तो नृत्य, नाटक, सीनेमा, ललित कला, संगीत और स्त्रियों के माध्यम से आय में वृद्धि होती है।
  • यदि शनि हो तो उद्योग, श्रम के कृषि माध्यम से धन जाता है ।

8. यदि लग्नाधिपति, द्वितीयेश और एकादशेश मित्र राशि में हों तो आय का सम्मानित कार्यों के लिए प्रयोग होता है अर्थात् उचित और धर्मार्थं ।

9. यदि द्वितीयेश और एकादशेश बुरे प्रभाव में हों और लग्नाधिपति के शत्रु हों तो शराब और स्त्रियों पर व्यय होता है।

10. यदि एकादशेश लग्न या त्रिकोण में उत्तम स्थिति में हो या अशुभ ग्रह ११ वें भाव में बली हो तो जातक के पास प्रचुर धन होगा ।

एकादश भाव में ग्रह

1. सूर्य – जातक की आयु लम्बी होती है और वह काफी धनी होता है। उसकी पत्नी, बच्चे और अनेक नौकर होंगे। उसे राजकीय और सरकार की ओर से पक्ष मिलता है और उसे बिना अधिक प्रयास के सफलता मिलती है, वह दूरदर्शी और सिद्धान्तवादी होगा।

2. चन्द्रमा – जातक कुलीन, उदार और धन पत्नी और बच्चों वाला होगा। वह स्वभाव से आत्मविश्लेषी और शान्तिप्रिय होगा। वह कारोबार में अच्छा लाभ करके प्रसिद्ध होगा। उसके पास काफी भूमि होगी और अपने प्रयासों में स्त्रियों की सहायता प्राप्त करेगा।

3. मंगल – जातकं निपुण और प्रभावकारी वक्ता, होशियार और अमीर होगा परन्तु व्यसनी होगा, भू सम्पति प्राप्त करेगा और उच्च वर्ग में अपना काफी प्रभाव रखेगा।

4. बुध – जातक अनेक विज्ञानों का विद्वान होगा। वह तेज बुद्धि वाला होगा, घनी, विश्वासी और सुखी होगा। उसके पास अनेक विश्वासी नौकर होंगे और वह इंजीनियरी उद्यम में सफल रहेगा।

5. बृहस्पति – जातक दीर्घजीवी होगा। उसके बच्चे कम होंगे। वह साहसी और धनी होगा तथा एक प्रसिद्ध व्यक्ति होगा। वह संगीत का शौकीन होगा, काफी धन इकट्ठा करेगा और उसके अनेक मित्र होंगे।

6. शुक्र – जातक घुमक्कड़ स्वभाव का होगा, उसे प्रचुर लाभ होगा और उसके पास ऐशोआराम के अनेक साधन होंगे। उसकी कमजोरी स्त्रियां होंगी और वह उनकी संगति में रहेगा । उसके अनेक मित्र होंगे और वह लोकप्रिय होगा।

7. शनि – जातक अनेक पृरुषों और महिलाओं को रोजगार पर लगाकर धन कमाएगा। उसके मित्र बहुत कम होंगे, वह आमोद प्रमोद का शौकीन होगा और सरकारी साधनों से धन कमाएगा। यह लम्बी आयु और स्वस्थ जीवन वाला होगा और राजनीति में भाग लेगा तथा उसे काफी आदर मिलेगा।

8. राहु – जातक थल सेना या जल सेना में जाता है। वह प्रसिद्ध, घनी और विद्वान होगा; उसके बच्चे बहुत कम होंगे तथा उसे कान की बीमारी होगी तथा वह विदेश में काफी धन कमाएगा।

9. केतु – जातक को जमाखोरी की आदत होगी। उसके पास लाटरी, घुड़दौड़ और स्टाक विनिमय जैसे सट्टा के माध्यम से काफी धन आ सकता हैं। वह कुलीन होगा और उसके मस्तिष्क और हृदय में अनेक उत्तम गुण होंगे। उसे अपने सभी उद्यमों में सफलता मिलेगी और वह धर्मार्थ तथा इसी प्रकार के कामों में भाग लेगा।


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