कुंडली के तीसरे भाव का महत्व

कुंडली के तीसरे भाव का महत्व तृतीय भाव से अनुसंधान, मित्रता, अचानक मृत्यु, लेखन कला, महान् धन, आत्मघात, विपरीत राजयोग, वायुयान यात्रा आदि का विचार किया जाता है। 1. निजत्व – मनुष्य अपने विचारों तथा भावनाओं को क्रियात्मक रूप देने के लिए बहुधा अपनी भुजाओं का प्रयोग करता है, अतः Read more

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व दूसरे भाव से रूप लावण्य, विद्या, कला, गूंगापन, गोद जाना, शासन आदि का विचार किया जाता है। 1. जैसे लग्न से चतुर्थ लग्न का अर्थात् निज (Self) का घर है, इसी प्रकार एकादश, अर्थात् आमदनी कमाई से प्राप्त धन आदि के रखने की जगह, Read more

कुंडली के पहले भाव का महत्व

कुंडली के पहले भाव का महत्व लग्न से जातक के रंग, रूप, कद, आकृति स्वभाव, सुख-समृद्धि, यश, मान, आजीविका आदि का विचार किया जाता है। लग्न और मनुष्य का स्वभाव मनुष्य के स्वभाव का विचार जहां चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा चन्द्र पर पड़ने वाले शुभाशुभ प्रभाव द्वारा करना चाहिए वहां Read more

ग्रह परिचय

ग्रह परिचय सूर्य 1. सूर्य गर्मी देता है, यह सबका अनुभव है । अतः सूर्य को आग माना गया है । जब मंगल, केतु आदि अन्य अग्निद्योतक ग्रहों के साथ मिलकर सूर्य लग्न, लग्नेश, चन्द्र लग्न, चन्द्र लग्नेश आदि व्यवसाय द्योतक अंगों पर प्रभाव डालता है तो मनुष्य अग्नि से Read more

ज्योतिष के कुछ विशेष नियम

ज्योतिष के कुछ विशेष नियम 1. जब मनुष्य से नौकरी छिन जाए, घरबार छूट जाए, स्त्री का त्याग हो जाए, भोग-विलास का त्याग हो जाए तो ऐसे त्याग अथवा अलगाव के पीछे अक्सर अलगावदी ग्रहों का प्रभाव रहता है। राहु, शनि तथा सूर्य में से दो अथवा तीन ग्रह जिस Read more