रत्नों का बीमारियों पर प्रभाव

रत्नों का बीमारियों पर प्रभाव माणिक्य अजीर्ण : जिस व्यक्ति ने वर्मा के माणिक्य को सोने की अंगूठी में धारण कर रखा हो, वह कुनकुने पानी में अंगूठी को 13 मिनट तक हिलाए एवं उस पानी को पी ले। यदि यह बीमारी ज्यादा पुरानी हो, तो ककड़ी के रस में Read more

उपरत्नों का महत्व ऐवम उपयोग

उपरत्नों का महत्व ऐवम उपयोग उपरत्न : नीली नीलम का सर्वश्रेष्ठ उपरत्न नीली है, श्रेष्ठ नीली पूर्णरूपेण पारदर्शक तथा कुछ श्याम सी आभा लिए हुये नीले रंग की होती है। दोष युक्त नीली धारण करना श्रेष्ठ नहीं होता। यह रत्न देखने से काँच का आभास होता हैं, लेकिन यदि इसे Read more

नव ग्रहों के रत्न और उनके गुण दोष

माणिक्य भगवान सूर्य को ग्रहराज कहा जाता है, इन्हीं के प्रताप से मानव जीवन का विकास होता है. कुण्डली में सूर्य की क्षीण स्थिति को शक्तिपूर्ण बनाने के लिए सूर्यरत्न माणिक्य धारण के लिए परामर्श दिया जाता है। माणिक्य एक अत्यधिक मूल्यवान तथा शोभायुक्त रत्न है । ऐसा विश्वास है Read more

रत्न एवं ग्रहों के संबंध पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण

औषधि मणि मंत्राणां ग्रह नक्षत्र तारिका । भाग्य काले भवेत्सिद्धिः अभाग्यं निष्फलं भवेत् । । औषधि, रत्न एवं मंत्र ग्रह जनित रोगों को दूर करते हैं। यदि समय सही हो, तो इनसे उपयुक्त फल प्राप्त होते हैं। विपरीत समय में ये सभी निष्फल हो जाते हैं। जन साधारण रत्नों की Read more

कुंडली देख कर रत्न का चुनाव करना सीखिये

कुंडली देख कर रत्न का चुनाव करना सीखिये ज्योतिष का अटल एवम् मौलिक सिद्धान्त है कि संसार का कोई भी पदार्थ क्यों न हों और उस का जीवन के किसी भी विभाग से संबन्ध क्यों न हो, उस पदार्थ का प्रतिनिधित्व कोई न कोई ग्रह अवश्य करता है। जैसे हम Read more

लग्न के अनुसार रत्न धारण का विवेचन

मेष लग्न में रत्न धारण का वैज्ञानिक विवेचन 1. माणिक्य – मेष लग्न में सूर्य पंचम त्रिकोण का स्वामी है और लग्नेश मंगल का मित्र है। अतः मेष लग्न के जातक को बुद्धि-बल प्राप्त करने, आत्मोन्नति के लिए, संतान सुख, प्रसिद्धि राज्य कृपा प्राप्ति के लिए सदा माणिक्य धारण करना Read more

केतु का रत्न लहसुनिया कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

केतु-रत्न या लहसुनिया को लहसनिया, संस्कृत में सूत्रमणि अथवा वैदूर्य, फारसी में वंडर तथा अंग्रेजी में ‘कैट्स आई स्टोन’ (Cat’s Eye Stone) कहते हैं। इस मणि में सफेद धारियाँ पाई जाती हैं । दो, तीन अथवा चार धारियाँ होना साधारण बात है । परन्तु उत्तम कोटि का लहसनिया वह कहलाता Read more

राहु का रत्न गोमेदक कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

गोमेदक प्रमुखतः राहु का रत्न माना गया है। इसे फारसी में मेदक तथा अंग्रेजी में झिरकान (Zircon) कहते हैं। इसका रंग पीला-पीला-सा गोमूत्र के समान होता है, साथ ही इसमें श्यामला मिश्रित मधु की झाई भी दिखाई दे जाती है। यह अधिकतर चीन, बर्मा, अरब, सिंधु नदी के किनारे पाया Read more

शनि का रत्न नीलम कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

नीलम शनिदेव का प्रधान रत्न है। इसे संस्कृत में इन्द्रनीलमणि, हिन्दी में नीलम, फारसी में नीलविल याकूत और अंग्रेजी भाषा में सेफायर टरग्यूज (Sapphire Turguese) कहते हैं। अधिकतर नीलम हिमालय, विन्ध्य, आबू पर्वतों के अंचल में, लंका, काबुल, जावा आदि की ओर मिलता है । प्रत्येक वर्ण के लिए इस Read more

शुक्र का रत्न हीरा कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

संस्कृत में इसे वज्रमणि या इन्द्रमणि, हिन्दी में हीरा, फारसी में अलिमास और अंग्रेजी में डायमण्ड (Diamond) कहते हैं । यह रत्न-राज कहलाता है, क्योंकि अन्य समस्त रत्नों में यह दुर्लभ और कीमती होता है । समस्त देवतागण इसे धारण करते हैं। भाग्यवान देशों में ही इसकी खानें होती हैं Read more