बृहस्पति का रत्न पुखराज कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

संस्कृत में इसे पुष्पराग, हिन्दी में पुखराज या पुषराज, फारसी में जर्द याकूत, अंग्रेजी भाषा में टोपे (Topaz) कहते हैं। यह मुख्यतः लंका, उड़ीसा तथा बंगाल के अंचलों में, ब्रह्मपुत्र के आसपास और विन्ध्य तथा हिमालय पहाड़ के अंचल में पाया जाता है । यह मुख्यतः पाँच रंगों में पाया Read more

बुध का रत्न पन्ना कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

पन्ना बुध ग्रह का रत्न कहा गया है। इसे संस्कृत में मरकत मणि, फारसी में जमरन, हिन्दी में पन्ना और अंग्रेजी में एमराल्ड (Emerald) कहते हैं। इसका रंग हरा होता है तथा अधिकतर दक्षिण महानदी, हिमालय, गिरनार और सोमनदी के पास पाया जाता है। इस रत्न को धारण करने वाले Read more

मंगल का रत्न मूंगा कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

इसे संस्कृत में विद्रुम, फारसी में मिरजान और अंग्रेजी में कोरल (Coral) कहते हैं । इसका स्वामी मंगल है। हिमालय पहाड़ और मानसरोवर के पास यह पाया जाता है। मूँगा मुख्यतः चार रंग का होता है -लाल, सिन्दूरी, हिंगुले के रंग-सा और गेरुआ। मूंगे के गुण प्रत्येक प्रकार के मूंगे Read more

चंद्र का रत्न मोती कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

मोती को संस्कृत में मुक्तक कहते हैं। चन्द्रमा इसका स्वामी है तथा इसके धारण करने से चन्द्रमा सम्बन्धी दोष नष्ट हो जाते हैं । 1. गजमुक्तक: यह मोती संसार में सर्वश्रेष्ठ होते हैं तथा कठिनता से प्राप्त होते हैं। जिन हाथियों का जन्म पुष्य या श्रवण नक्षत्र में चन्द्र एवं Read more

सूर्य का रत्न माणिक कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

माणिक कई रंगों में पाया जाता है यथा – लाल, रक्तकमलवत् सिन्दूरी तथा वीरबहूटी आदि। काबुल, लंका के अतिरिक्त भारत में गंगा नदी के किनारे ये रत्न पाये जाते हैं। विन्ध्याचल और हिमालय के अंचलों में भी इसकी खानें पायी जाती हैं। मुख्यतः माणिक में पाँच गुण पाये जाते हैं Read more