पागलपन की विभिन्न अवस्थाएं

प्रायः कहा जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में पागल है, लेकिन जब यह पागलपन सनकीपन से भी आगे निकल जाता है तो मनुष्य को पागल कहकर पुकारा जाता है। पागलपन के कई प्रकार होते हैं और इसीलिए हाथ पर भी अनेक प्रकार के संकेत मिलते हैं। यहां हम पागलपन के जिन विभिन्न प्रकारों पर विचार करेंगे, वे इस प्रकार हैं।

  1. विषाद, आसक्ति, धर्मान्धता अथवा मतिभ्रम ।
  2. पागलपन का विकास।
  3. वास्तविक पागल व्यक्ति ।

1. विषाद, आसक्ति या धर्मान्धता अथवा मतिभ्रम : इस स्थिति में व्यक्ति का हाथ कुछ चौड़ा होता है तथा मस्तिष्क रेखा गहरा मोड़ लेती हुई चन्द्र पर्वत क्षेत्र तक जा पहुंचती है। इसके अतिरिक्त शुक्र पर्वत क्षेत्र समुचित रूप से विकसित नहीं होता, जिसके कारण उन्हें किसी व्यक्ति में दिलचस्पी नहीं होती तथा शनि पर्वत का प्रभुत्व स्पष्ट दिखाई पड़ता है।

धर्मान्ध व्यक्ति का हाथ भी ऐसा ही होता है। उसकी धर्मान्धता मतिभ्रम की स्थिति से गुजरती हुई कल्पनाशीलता के कारण पागलपन की सीमा तक पहुंच जाती है तथा वह धार्मिक कट्टरपन्थी बन जाता है। ऐसा व्यक्ति अपने विचारों की धारा में बहते हुए उन्मत्त होकर अपना मानसिक सन्तुलन खो बैठता है और पागल हो जाता है।

2. पागलपन का विकास : यह प्रायः चमचाकार और दार्शनिक दो प्रकार के हाथों में दिखाई पड़ता है। अत्यधिक चमचाकार हाथों पर एक ढलवां मस्तिष्क रेखा दिखाई पड़ती है जो आरम्भ में तो बहुत मौलिकता के साथ हर सम्भव दिशा में दीख पड़ती है, परन्तु अनेक कार्यों व योजनाओं में व्यस्त होने के कारण जब इतने अधिक विचार व्यक्ति के मस्तिष्क में भर जाते हैं कि वह कुछ भी नहीं कर पाता और जब ऐसा व्यक्ति अपने विचारों को व्यावहारिक रूप नहीं दे पाता तो वह पागलों के समान दिखाई पड़ता है। यदि ऐसे व्यक्ति को अवसर मिल जाए तो वह बड़े-बड़े आविष्कार भी कर सकता है।

दार्शनिक हाथों में मस्तिष्क रेखा का सहसा मुड़ कर चन्द्र पर्वत क्षेत्र में पहुंच जाना व्यक्ति के मन में एक सनक पैदा कर देता है कि सम्पूर्ण मानव जाति की रक्षा केवल वही कर सकता है। ऐसे व्यक्ति के उद्देश्य कभी भी गलत नहीं होते, लेकिन अपने विचारों की यथार्थता सिद्ध करते-करते वह इतना कट्टरपन्थी बन जाता है कि उसकी हर हरकत पागलों के समान दीख पड़ती है।

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3. वास्तविक पागल व्यक्ति : इस प्रकार के पागलपन का कारण मस्तिष्क की प्रकृति होती है, जिसको हाथ के परीक्षण के अनुसार दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।

  • एक जड़ मूर्ख और
  • दूसरा खतरनाक पागल ।

पहले प्रकार के व्यक्ति के हाथ में चौड़ी एवं ढलवां मस्तिष्क रेखा दिखाई पड़ती है जो द्वीप एवं अनेक सूक्ष्म रेखाओं से पूर्ण होती है। इस प्रकार के व्यक्ति में बुद्धि नाम की कोई चीज नहीं होती तथा ऐसे व्यक्ति अविकसित मस्तिष्क लेकर ही पैदा होते हैं। उनका इलाज नहीं हो सकता।

दूसरे प्रकार के व्यक्ति वे होते हैं जिनके हाथों पर

  • मस्तिष्क रेखा छोटे-छोटे लहरदार टुकड़ों से बनी होती है तथा विभिन्न दिशाओं की ओर मुड़ी दिखाई देती है। ऐसे हाथों पर जीवन रेखा के भीतर मंगल पर्वत क्षेत्र से आरम्भ होकर हाथ के दूसरे मंगल क्षेत्र तक जाती अनेक रेखाएं दीखती हैं।
  • ऐसे हाथों पर नाखून छोटे और लाल रंग के होते हैं।

ऐसे व्यक्ति झगड़ालू एवं खतरनाक किस्म के पागल होते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी-कभार ही होश में आते हैं, परन्तु ऐसा बहुत कम सम्भव होता है। ऐसे लोगों के सुधार की आशा नहीं होती ।

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