प्रश्न कुंडली से विवाह का विचार

विवाह का विचार द्वितीय और सप्तम भाव और उनके अधिपतियों द्वारा और कारक शुक्र और चंद्र द्वारा किया जाता है। वर को वधु प्राप्त होगी, अगर 1. शनि लग्न के अतिरिक्त किसी भाव में सम राशि में स्थित हो । 2. चंद्र लग्न में स्थित होकर दशमेश से दृष्ट हो Read more

प्रश्न कुंडली से चोरी और गायब सामान की वापसी

चोरी और गायब सामान की वापसी लग्न प्रश्नकर्ता का प्रतिनिधि है। चंद्रमा खोये हुए सामान का प्रतिनिधि है। चतुर्थ भाव खोये सामान और उसकी पुनर्प्राप्ति का प्रतिनिधि है। सप्तम भाव चोर का प्रतिनिधि है जबकि अष्टम भाव चोर द्वारा जमा धन का प्रतिनिधि है। दशम भाव पुलिस या सरकार का Read more

प्रश्न कुंडली से यात्रा और यात्री का विचार

यात्रा और यात्री यात्रा का अर्थ किसी उद्देश्य से घर से बाहर जाना है। यात्रा 4 प्रकार की होती हैं। प्रतिदिन की यात्रा का संकेत लग्नेश और तृतीयेश और उनकी स्थिति वाले भावों के मध्य निर्मित इत्थसाल से प्राप्त होता है। तृतीयेश या लग्नेश राशि कुंडली या नवमांश में चर Read more

प्रश्न कुंडली से रोगी और रोग का ज्ञान

प्रश्न कुंडली से रोगी और रोग का ज्ञान अधिकांशतः दो प्रश्न पूछे जाते हैं :- कोई भी प्रश्नकर्ता मेरे पास ज्योतिष के माध्यम से बीमारी के निदान के लिए नहीं आया। अतः हम उपरोक्त दो प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। प्रश्न ज्योतिष में लग्न से डॉक्टर (वह व्यक्ति जो Read more

प्रश्न कुंडली से कार्य सिद्धि का विचार

प्रश्न कुंडली से कार्य सिद्धि का विचार प्रश्नकुंडली का विश्लेषण करते समय कार्य में सफलता मिलेगी अगर 1. लग्नेश और कार्येश दोनों शुभ ग्रह हों और शुभ भाव में इत्थसाल योग बनाते हों । 2. लग्नेश की लग्न पर और कार्येश की कार्यभाव पर दृष्टि हो 3. लग्नेश की कार्य Read more

लग्न और भावों के बल

लग्न और भावों के बल सर्वविदित है कि प्रश्न ज्योतिष में लग्न और लग्नेश महत्वपूर्ण हैं। इनका बली यॉ निर्बल होना प्रश्न की सफलता-असफलता का द्योतक है। कभी-कभी लग्न, लग्न में स्थित ग्रह, लग्न की राशि लग्न पर दृष्टि या लग्नेश के आधार पर प्रश्न के सभी पहलुओं पर जानकारी Read more

प्रश्न की प्रकृति

प्रश्न कुंडली के विश्लेषण से पूर्व यह जांचना आवश्यक है कि क्या यह प्रश्न की पुष्टि करती है या नहीं। क्योंकि प्रश्न जातक से स्वयं संबंधित होता है, अतः लग्न और लग्नेश कारक होते हैं। लग्न, चंद्र और नवमांश लग्न के बल का आकलन करें। उनके बली होने और शुभ Read more

भावों के कारकत्व

भावों के बल 1. जिस भाव का स्वामी उसमें स्थित हो या उस भाव पर भावेश की दृष्टि हो तो उस भाव की शुभता उत्तम होती है। 2. जिस भाव में बृहस्पति, बुध या शुक्र या बली चंद्र स्थित होते हैं या इन ग्रहों की उस भाव पर दृष्टि होती Read more

ताजिक दृष्टियां और योग

ताजिक दृष्टियां और योग पराशर के मतानुसार दृष्टियां प्रत्येक ग्रह जिस भाव में स्थित है, उससे 7वें भाव पर दृष्टि डालता है। इसके अतिरिक्त, हमने आंशिक दृष्टियों पर ध्यान नहीं दिया है, केवल पूर्ण दृष्टियों का प्रयोग किया है। दृष्टा ग्रह नैसर्गिक शुभ या लग्नानुसार शुभ होने पर जिस भाव Read more

ग्रह की विशेषताएं

ग्रह की विशेषताएं सूर्य – सूर्य पिता, साहस, कार्य शक्ति, ऊर्जा, व्यक्तित्व, अधिकार, सात्विक प्रकृति का कारक है। सूर्य से प्रभावित जातक का चेहरा विशाल और गोल, आंखों का रंग शहद जैसा होता है जातक महत्वाकांक्षी, साहसी, उदार होता है। चंद्र – चंद्र माता, मस्तिष्क और तरल पदार्थों का कारक Read more