कुंडली के पॉचवें भाव का महत्व

कुंडली के पॉचवें भाव का महत्व पंचम भाव से मंत्री पद योग, पुत्र प्राप्ति, प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता, प्रेम विवाह, लाटरी आदि का विचार किया जाता है। 1. बुद्धि से सम्बन्ध – पंचम भाव का बुद्धि से सम्बन्ध होने के कारण विद्या सम्बन्धी प्रश्नों का विवेचन पंचम भाव, उसके स्वामी Read more

कुंडली के चौथे भाव का महत्व

कुंडली के चौथे भाव का महत्व चतुर्थ भाव से नेतृत्व सफल या असफल, भूमि से लाभ, बदली, शत्रुता, पुत्र से सुख या दुःख, देश निकाला, विद्रोह, अचानक कष्ट आदि का विचार किया जाता है। 1. पागलपन – यदि चतुर्थ भाव तथा उसका स्वामी तथा चन्द्र, बुद्धिद्योतक अन्य अंगों जैसे – Read more

कुंडली के तीसरे भाव का महत्व

कुंडली के तीसरे भाव का महत्व तृतीय भाव से अनुसंधान, मित्रता, अचानक मृत्यु, लेखन कला, महान् धन, आत्मघात, विपरीत राजयोग, वायुयान यात्रा आदि का विचार किया जाता है। 1. निजत्व – मनुष्य अपने विचारों तथा भावनाओं को क्रियात्मक रूप देने के लिए बहुधा अपनी भुजाओं का प्रयोग करता है, अतः Read more

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व दूसरे भाव से रूप लावण्य, विद्या, कला, गूंगापन, गोद जाना, शासन आदि का विचार किया जाता है। 1. जैसे लग्न से चतुर्थ लग्न का अर्थात् निज (Self) का घर है, इसी प्रकार एकादश, अर्थात् आमदनी कमाई से प्राप्त धन आदि के रखने की जगह, Read more

कुंडली के पहले भाव का महत्व

कुंडली के पहले भाव का महत्व लग्न से जातक के रंग, रूप, कद, आकृति स्वभाव, सुख-समृद्धि, यश, मान, आजीविका आदि का विचार किया जाता है। लग्न और मनुष्य का स्वभाव मनुष्य के स्वभाव का विचार जहां चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा चन्द्र पर पड़ने वाले शुभाशुभ प्रभाव द्वारा करना चाहिए वहां Read more

ग्रह परिचय

ग्रह परिचय सूर्य 1. सूर्य गर्मी देता है, यह सबका अनुभव है । अतः सूर्य को आग माना गया है । जब मंगल, केतु आदि अन्य अग्निद्योतक ग्रहों के साथ मिलकर सूर्य लग्न, लग्नेश, चन्द्र लग्न, चन्द्र लग्नेश आदि व्यवसाय द्योतक अंगों पर प्रभाव डालता है तो मनुष्य अग्नि से Read more

ज्योतिष के कुछ विशेष नियम

ज्योतिष के कुछ विशेष नियम 1. जब मनुष्य से नौकरी छिन जाए, घरबार छूट जाए, स्त्री का त्याग हो जाए, भोग-विलास का त्याग हो जाए तो ऐसे त्याग अथवा अलगाव के पीछे अक्सर अलगावदी ग्रहों का प्रभाव रहता है। राहु, शनि तथा सूर्य में से दो अथवा तीन ग्रह जिस Read more

दशा और गोचर

दशा और गोचर दशा उस पद्धति का नाम है जिसमें जन्मकालीन चन्द्राधिष्ठित नक्षत्र के स्वामी की अवधि के अनुसार जन्मकालीन ग्रह की दशा का निर्णय किया जाता है और तदनन्तर क्रमानुसार अन्य ग्रहों की दशाओं को निर्धारित किया जाता है। स्पष्ट है कि दशा का निर्णय जन्मकालीन स्थिर ग्रह स्थिति Read more

दशाफल रहस्य

दशाफल रहस्य दशा के सम्बन्ध में शास्त्रों की कुछ बातें यहाँ लिखी जा रही हैं ताकि पाठक दशाभुक्ति का ठीक-ठाक फल कह सकें। 1. जो ग्रह आधिपत्य के कारण शुभ श्रेणी में है वह जितना अधिक बलवान् होगा उतना ही वह अपनी दशा अथवा भुक्ति में अधिक शुभ फल करेगा। Read more

अन्तर्दशा की घटनाओं का निर्णय – 2

अन्तर्दशा की घटनाओं का निर्णय घटनाओं का स्वरूप भुक्तिनाथ तथा दशानाथ से पीड़ित अंगों द्वारा इस विषय का एक और नियम यह है कि वे भाव आदि दो अंग जो पापी दशानाथ तथा पापी भुक्तिनाथ दोनों से प्रभावित हों, अपने स्वरूप से घटनाओं के अनिष्ट स्वरूप को दर्शायेंगे। इस सिद्धांत Read more