कुंडली के सातवें भाव का महत्व

कुंडली के सातवें भाव का महत्व सप्तम भाव से वैवाहिक सुख, बड़े घर से शादी, बहु विवाह, विवाह और उसका समय, प्रेम विवाह, तलाक आदि का विचार किया जाता है। 1. कामातुरता – यदि सप्तम स्थान तथा उसके स्वामी के साथ तथा शुक्र के साथ मंगल स्थित हो अथवा मंगल Read more

कुंडली के छठे भाव का महत्व

कुंडली के छठे भाव का महत्व षष्ठ भाव से गोद जाना, विपरीत राजयोग चोट, रोग, चोरी हो जाना, हिंसा आदि का विचार किया जाता है। 1. परत्व तथा अन्यत्व – छठा भाव शत्रु स्थान कहलाता है। शत्रु निज हित की हानि करता है, अतः वह अपना नहीं, पराया कहलाता है। Read more

कुंडली के पॉचवें भाव का महत्व

कुंडली के पॉचवें भाव का महत्व पंचम भाव से मंत्री पद योग, पुत्र प्राप्ति, प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता, प्रेम विवाह, लाटरी आदि का विचार किया जाता है। 1. बुद्धि से सम्बन्ध – पंचम भाव का बुद्धि से सम्बन्ध होने के कारण विद्या सम्बन्धी प्रश्नों का विवेचन पंचम भाव, उसके स्वामी Read more

कुंडली के चौथे भाव का महत्व

कुंडली के चौथे भाव का महत्व चतुर्थ भाव से नेतृत्व सफल या असफल, भूमि से लाभ, बदली, शत्रुता, पुत्र से सुख या दुःख, देश निकाला, विद्रोह, अचानक कष्ट आदि का विचार किया जाता है। 1. पागलपन – यदि चतुर्थ भाव तथा उसका स्वामी तथा चन्द्र, बुद्धिद्योतक अन्य अंगों जैसे – Read more

कुंडली के तीसरे भाव का महत्व

कुंडली के तीसरे भाव का महत्व तृतीय भाव से अनुसंधान, मित्रता, अचानक मृत्यु, लेखन कला, महान् धन, आत्मघात, विपरीत राजयोग, वायुयान यात्रा आदि का विचार किया जाता है। 1. निजत्व – मनुष्य अपने विचारों तथा भावनाओं को क्रियात्मक रूप देने के लिए बहुधा अपनी भुजाओं का प्रयोग करता है, अतः Read more

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व दूसरे भाव से रूप लावण्य, विद्या, कला, गूंगापन, गोद जाना, शासन आदि का विचार किया जाता है। 1. जैसे लग्न से चतुर्थ लग्न का अर्थात् निज (Self) का घर है, इसी प्रकार एकादश, अर्थात् आमदनी कमाई से प्राप्त धन आदि के रखने की जगह, Read more

कुंडली के पहले भाव का महत्व

कुंडली के पहले भाव का महत्व लग्न से जातक के रंग, रूप, कद, आकृति स्वभाव, सुख-समृद्धि, यश, मान, आजीविका आदि का विचार किया जाता है। लग्न और मनुष्य का स्वभाव मनुष्य के स्वभाव का विचार जहां चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा चन्द्र पर पड़ने वाले शुभाशुभ प्रभाव द्वारा करना चाहिए वहां Read more

ग्रह परिचय

ग्रह परिचय सूर्य 1. सूर्य गर्मी देता है, यह सबका अनुभव है । अतः सूर्य को आग माना गया है । जब मंगल, केतु आदि अन्य अग्निद्योतक ग्रहों के साथ मिलकर सूर्य लग्न, लग्नेश, चन्द्र लग्न, चन्द्र लग्नेश आदि व्यवसाय द्योतक अंगों पर प्रभाव डालता है तो मनुष्य अग्नि से Read more

ज्योतिष के कुछ विशेष नियम

ज्योतिष के कुछ विशेष नियम 1. जब मनुष्य से नौकरी छिन जाए, घरबार छूट जाए, स्त्री का त्याग हो जाए, भोग-विलास का त्याग हो जाए तो ऐसे त्याग अथवा अलगाव के पीछे अक्सर अलगावदी ग्रहों का प्रभाव रहता है। राहु, शनि तथा सूर्य में से दो अथवा तीन ग्रह जिस Read more

दशा और गोचर

दशा और गोचर दशा उस पद्धति का नाम है जिसमें जन्मकालीन चन्द्राधिष्ठित नक्षत्र के स्वामी की अवधि के अनुसार जन्मकालीन ग्रह की दशा का निर्णय किया जाता है और तदनन्तर क्रमानुसार अन्य ग्रहों की दशाओं को निर्धारित किया जाता है। स्पष्ट है कि दशा का निर्णय जन्मकालीन स्थिर ग्रह स्थिति Read more