भावार्थ रत्नाकर | मिथुन लग्न | कन्या लग्न

मिथुन लग्न 1. तृतीयस्थौ रविबुध बुधचाये समागमे । बुधो योगप्रदस्सत्यं युग्मजातस्य भाग्यदः ॥१॥ भावार्थ – यदि मिथुन लग्न में जन्म हो और सूर्य और बुध तृतीय भाव में स्थित हों, तो बुध अपनी दशा भुक्ति में बहुत धनदायक आदि सिद्ध होता है। व्याख्या – बुध के सम्बन्ध में मौलिक बात Read more

भावार्थ रत्नाकर | वृषभ लग्न | तुला लग्न

वृषभ लग्न 1. वृषभजातस्य च शनिः भाग्यकर्मेश्चरोऽपि वा । सोमसुताभ्याम् वा न युक्रतौ नैव योगदः ॥ १ ॥ भावार्थ – वृषभ लग्न में जन्म हो, तो शनि केन्द्र (दशम) तथा त्रिकोण (नवम) का स्वामी होता हुआ भी योग (बहुत शुभ) फल नहीं दे सकता, यदि इसके साथ सूर्य तथा बुध Read more

भावार्थ रत्नाकर | मेष लग्न | वृश्चिक लग्न

मेष लग्न 1. मेषलग्ने तु जातस्य राजयोगीऽपि लभ्यते । चतुर्थ पञ्चमाधीश संबन्धेन न संशयः ॥ १ ॥ भावार्थ – मेष लग्न में जन्म लेने वालों की जन्म कुण्डली में यदि चतुर्थ और पंचम भाव के स्वामियों का परस्पर (दृष्टि योग आदि) संबंध हो, तो जातक को निश्चय ही राजयोग की Read more

कुंडली देख कर रत्न का चुनाव करना सीखिये

कुंडली देख कर रत्न का चुनाव करना सीखिये ज्योतिष का अटल एवम् मौलिक सिद्धान्त है कि संसार का कोई भी पदार्थ क्यों न हों और उस का जीवन के किसी भी विभाग से संबन्ध क्यों न हो, उस पदार्थ का प्रतिनिधित्व कोई न कोई ग्रह अवश्य करता है। जैसे हम Read more

दशाफल कहने के नियम

दशाफल कहने के नियम ग्रह कब ? कैसे ? कितना ? फल देते हैं इस बात का दशा अन्तर्दशा आदि से किया जाता है । दशा कई प्रकार की हैं, परन्तु सब में शिरोमणि विंशोत्तरी दशा है । इस अध्याय में हम विंशोत्तरी दशा के प्रयोग के कुछ आवश्यक नियमों Read more

कुंडली के बरहवें भाव का महत्व

कुंडली के बरहवें भाव का महत्व द्वादश भाव से आंखों तथा पांवों पर प्रभाव, मोक्ष प्राप्ति, खर्च की दशा का विचार किया जाता है। 1. दृष्टि हानि – द्वादश स्थान में सूर्य अथवा चन्द्र का पापयुति अथवा पापदृष्टि में स्थित होना आंखों की दृष्टि की हानि का कारण है क्योंकि Read more

कुंडली के ग्यारहवें भाव का महत्व

कुंडली के ग्यारहवें भाव का महत्व एकादश भाव से ससुराल से धन प्राप्ति, बड़े भाई की स्थिति, चोट का योग, हवाई यात्रा, हिंसक प्रवृत्ति, माता व बहनों से सुख की कमी आदि का विचार किया जाता है। 1. आय स्थान – एकादश स्थान प्राप्ति का स्थान है प्राप्ति, आय, आमदनी Read more

कुंडली के दसवें भाव का महत्व

कुंडली के दसवें भाव का महत्व दशम भाव से  जातक की उन्नति, तीर्थलाभ, साम्राज्य योग व्यवसाय, अवनति तथा अपयश आदि का विचार किया जाता है। 1. दशम में ग्रह – दशम भाव में विविध ग्रहों का फल देवकेरलकार ने निम्नलिखित प्रकार से कहा है:- (क) (ख)  (ग) केन्द्रों में प्रमुख Read more

कुंडली के नौवें भाव का महत्व

कुंडली के नौवें भाव का महत्व प्रभुकृपा, राज्यभोग, देश में यात्रा, भाग्योदय (आकस्मिक लाभ), पौत्र तथा पुत्र की प्राप्ति, दूसरी पत्नी से पुत्र 1. धार्मिक जीवन – जब लग्न अथवा लग्नेश के साथ नवम अथवा नवमेश का घनिष्ठ सम्बन्ध उत्पन्न हो जाता है तो मनुष्य में भाग्य और धर्म दोनों Read more

कुंडली के आठवें भाव का महत्व

कुंडली के आठवें भाव का महत्व आयु कितनी ? मृत्यु कब और कैसे ? विपरीत राजयोग से महाधन विदेश यात्रा का योग, कर्कशा स्त्री, गम्भीर अन्वेषण आदि 1. आयु का निर्णय – आयु के सम्बन्ध में हमारा विचार है कि जितना अष्टमेश बलवान् होगा उतनी ही आयु अधिक होगी। हम Read more