विपरीत राजयोग – रंक से बना देता है राजा !

विपरीत राजयोग से असाधारण धन 1. जब शुभ घरों के स्वामी बली होते हैं तो धन मिलता है । इस सिद्धान्त का विवेचन आप पढ़ चुके हैं। परन्तु ऐसा भी देखा गया है कि प्रचुर धन की प्राप्ति अनिष्ट भावों के स्वामियों की निर्बलता से भी होती है। बल्कि धन Read more

धन प्राप्ति में लग्न का महत्त्व

धन प्राप्ति में लग्न का महत्त्व धन प्राप्ति के सन्दर्भ में ‘लग्न’ का कितना महत्त्व है । इस तथ्य का अनुमान हमको ‘सारावली’ – कार के निम्नलिखत श्लोक द्वारा हो सकता है :- “लग्ने तयो विगत शोक विवद्धितानां, कुर्वन्ति जन्म शुभदाः पृथिवीपतीनाम् । पापास्तु रोग भय शोक परिप्लुतानाम् बह्व्याशिनां सकल Read more

लग्नो के विशेष धनादायक ग्रह

लग्नो के विशेष धनादायक ग्रह ‘राजयोग’ कारक ग्रहों की अन्तरदशा में विशेष धन, मान, पदवी की प्राप्ति होती है। संक्षेप में विविध लग्नों के लिये विशेष धन देने वाले ग्रहों का उल्लेख नीचे किया जाता है । 1. जब दो धनदायक ग्रह दृष्टि, योग, व्यत्यय (Exchange) आदि द्वारा परस्पर संबन्धित Read more

पाराशरीय धनदायक योग

पाराशरीय धनदायक योग महर्षि पाराशर का आदेश है कि जैसे भगवान् विष्णु के अवतरण- समय पर उनकी शक्ति-लक्ष्मी उनसे मिलती है तो संसार में उपकार की सृष्टि होती है । इसी प्रकार जब केन्द्र-घरों के स्वामियों का योग त्रिकोण घरों के स्वामियों से होता है अथवा जब एक ही ग्रह Read more

ग्रहों का आजीविका और व्यवसाय पर प्रभाव

आजीविका का अध्ययन जातक की आजीविका के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्न तथ्यों का अवलोकन करना चाहिए – 1. दशम भाव, दशमेश, बुध (बुद्धि कारक), शनि (कर्म कारक)। 2. भावात-भावम के सिद्धांत के अनुसार – सप्तम, सप्तमेश, शुक्र (दैनिक कर्म)। 3. D1 के दशमेश का D9 में Read more

कुण्डली की वैज्ञानिक व्याख्या

कुण्डली की वैज्ञानिक व्याख्या कुण्डली कागज पर आसमान का जन्म समय का नक्शा है । जो स्थिति इस नक्शे में ग्रहों की होती है वही स्थिति उस समय उत्पन्न होने वाले व्यक्ति के जीवन की होती है, क्योंकि जो भी कोई उत्पन्न होता है उसके लिए उसके जन्म-समय की प्रकृति Read more

कुंडली में राहु और केतु का प्रभाव

कुंडली में राहु और केतु का प्रभाव चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है। वह पृथ्वी की परिक्रमा तो करता ही है, साथ ही पृथ्वी की भांति सूर्य की भी परिक्रमा करता है। चंद्रमा और पृथ्वी की कक्षाएं समांतर नहीं हैं। ये परस्पर 50° का कोण बनाती हैं। ये दोनों कक्षाएं दो Read more

शनि की साढ़े साती और ढय्या

शनि की साढ़े साती और ढय्या शनि एक मंद गति से चलने वाला ग्रह है। जब यह अशुभ ग्रह की तरह कार्य करता है तो संबद्ध जातक के जीवन पर इसका बहुत धीरे-धीरे लेकिन स्थिर प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव इतना अधिक पीड़ादायक होता है कि इसके कारण लोग शनि Read more

कुंडली में शनि का प्रभाव

कुंडली में शनि का प्रभाव ज्योतिष शास्त्र में शनि को प्राकृतिक अशुभ या क्रूर ग्रह मानकर इसकी टेढ़ी-मेढ़ी सीधी चालों से भय माना जाता रहा है। लेकिन कई लग्नों वाले जातकों पर इसका चमत्कारिक रूप से शुभ प्रभाव भी पड़ता है। शनि को सौर परिवार का ही नहीं वरन् आकाशीय Read more

कुंडली में शुक्र का प्रभाव

कुंडली में शुक्र का प्रभाव सौरमंडल के मुख्य ग्रहों में से शुक्र ही ऐसा ग्रह है जिसे सूर्य और पृथ्वी दोनों का ही पड़ौसी कहा जा सकता है। शुक्र अपनी अंडाकार कक्षा में लगभग 22 मील प्रति सेकंड की गति से चलता हुआ लगभग 225 दिन (224 दिन 10 घंटे Read more