सुदर्शन तथा धनबाहुल्य
ग्रहों के फल का एक लग्न मात्र से फल न कहकर तीनों लग्नों लग्न, सूर्यलग्न, चन्द्रलग्न से विचार कर कहने का नाम ‘सुदर्शन’ पद्धति है । स्पष्ट ही है कि जब कोई ग्रह न केवल लग्न से ही शुभ अथवा योगकारक बनता हो बल्कि सूर्यलग्न तथा चन्द्रलग्न से भी शुभ Read more





