कुंडली के नौवें भाव का महत्व

कुंडली के नौवें भाव का महत्व प्रभुकृपा, राज्यभोग, देश में यात्रा, भाग्योदय (आकस्मिक लाभ), पौत्र तथा पुत्र की प्राप्ति, दूसरी पत्नी से पुत्र 1. धार्मिक जीवन – जब लग्न अथवा लग्नेश के साथ नवम अथवा नवमेश का घनिष्ठ सम्बन्ध उत्पन्न Read more

कुंडली के आठवें भाव का महत्व

कुंडली के आठवें भाव का महत्व आयु कितनी ? मृत्यु कब और कैसे ? विपरीत राजयोग से महाधन विदेश यात्रा का योग, कर्कशा स्त्री, गम्भीर अन्वेषण आदि 1. आयु का निर्णय – आयु के सम्बन्ध में हमारा विचार है कि Read more

कुंडली के सातवें भाव का महत्व

कुंडली के सातवें भाव का महत्व सप्तम भाव से वैवाहिक सुख, बड़े घर से शादी, बहु विवाह, विवाह और उसका समय, प्रेम विवाह, तलाक आदि का विचार किया जाता है। 1. कामातुरता – यदि सप्तम स्थान तथा उसके स्वामी के Read more

कुंडली के छठे भाव का महत्व

कुंडली के छठे भाव का महत्व षष्ठ भाव से गोद जाना, विपरीत राजयोग चोट, रोग, चोरी हो जाना, हिंसा आदि का विचार किया जाता है। 1. परत्व तथा अन्यत्व – छठा भाव शत्रु स्थान कहलाता है। शत्रु निज हित की Read more

कुंडली के पॉचवें भाव का महत्व

कुंडली के पॉचवें भाव का महत्व पंचम भाव से मंत्री पद योग, पुत्र प्राप्ति, प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता, प्रेम विवाह, लाटरी आदि का विचार किया जाता है। 1. बुद्धि से सम्बन्ध – पंचम भाव का बुद्धि से सम्बन्ध होने के Read more

कुंडली के चौथे भाव का महत्व

कुंडली के चौथे भाव का महत्व चतुर्थ भाव से नेतृत्व सफल या असफल, भूमि से लाभ, बदली, शत्रुता, पुत्र से सुख या दुःख, देश निकाला, विद्रोह, अचानक कष्ट आदि का विचार किया जाता है। 1. पागलपन – यदि चतुर्थ भाव Read more

कुंडली के तीसरे भाव का महत्व

कुंडली के तीसरे भाव का महत्व तृतीय भाव से अनुसंधान, मित्रता, अचानक मृत्यु, लेखन कला, महान् धन, आत्मघात, विपरीत राजयोग, वायुयान यात्रा आदि का विचार किया जाता है। 1. निजत्व – मनुष्य अपने विचारों तथा भावनाओं को क्रियात्मक रूप देने Read more

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व

कुंडली के दूसरे भाव का महत्व दूसरे भाव से रूप लावण्य, विद्या, कला, गूंगापन, गोद जाना, शासन आदि का विचार किया जाता है। 1. जैसे लग्न से चतुर्थ लग्न का अर्थात् निज (Self) का घर है, इसी प्रकार एकादश, अर्थात् Read more

कुंडली के पहले भाव का महत्व

कुंडली के पहले भाव का महत्व लग्न से जातक के रंग, रूप, कद, आकृति स्वभाव, सुख-समृद्धि, यश, मान, आजीविका आदि का विचार किया जाता है। लग्न और मनुष्य का स्वभाव मनुष्य के स्वभाव का विचार जहां चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा Read more

ग्रह परिचय

ग्रह परिचय सूर्य 1. सूर्य गर्मी देता है, यह सबका अनुभव है । अतः सूर्य को आग माना गया है । जब मंगल, केतु आदि अन्य अग्निद्योतक ग्रहों के साथ मिलकर सूर्य लग्न, लग्नेश, चन्द्र लग्न, चन्द्र लग्नेश आदि व्यवसाय Read more