कुंडली में यौन रोग देखने के सूत्र
कुंडली में यौन रोग देखने के सूत्र नपुंसकता नपुंसकता के पीछे कई तरह की स्थितियां काम करती है। इसके कारण पुरूष अपनी पत्नी के साथ सहवास करने में अक्षम बन जाता है या उसके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या घट Read more
कुंडली में यौन रोग देखने के सूत्र नपुंसकता नपुंसकता के पीछे कई तरह की स्थितियां काम करती है। इसके कारण पुरूष अपनी पत्नी के साथ सहवास करने में अक्षम बन जाता है या उसके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या घट Read more
कुंडली उदर रोग देखने के सूत्र वर्तमान में उदर (पेट) संबन्धी व्याधियां एक नई समस्या बन गयी है। अस्सी फीसदी से ज्यादा लोग किसी न किसी प्रकार की उदर संबन्धी व्याधि से ग्रस्त, परेशान देखे जा रहे है। यद्यपि उदर Read more
केतु सम्बंधित अंग और रोग केतु भी एक छायाग्रह है। यह पापी ग्रह होने के साथ अति शुभ ग्रह भी माना गया है। इसलिए किसी भी रोग में केतु की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रहती। जन्मकुंडली में केतु जिस किसी ग्रह Read more
राहू सम्बंधित अंग और रोग राहू पूर्णतः शनि की तरह फल देने वाला है। इसका प्रभाव जातक के प्रत्येक क्षेत्र पर पडता है। जब जन्मकुंडली में राहू के प्रभाव का कोई रोग होता है, तो वह बहुत मन्द गति से Read more
शनि सम्बंधित अंग और रोग शनि एक मन्दगति ग्रह है। इसका प्रभाव जातक के प्रत्येक क्षेत्र में अवश्य पडता है। जन्मकुंडली में जब शनि के प्रभाव से कोई रोग जन्म लेता है तो वह बहुत मन्द गति से ही ठीक Read more
शुक्र सम्बंधित अंग और रोग शुक्र भोग कारक ग्रह है। इसका प्रभाव जातक के भोग पर अधिक पडता है। जातक को यौन एंव जननेन्द्रिय संबंधी रोगों का सामना करना पडता है। जन्मकुंडली में शुक्र के निर्बल अथवा पीडित होने अथवा Read more
गुरू सम्बंधित अंग और रोग गुरू आकाश तत्वीय ग्रह है। गुरु का हमारे शरीर में चरबी, उदर, यकृत, त्रिदोष, विशेषकर कफ तथा रक्त वाहिनियों पर अधिकार रहता है। ज्योतिष शास्त्र में गुरू को संतान कारक ग्रह माना गया है। जिन Read more
बुध सम्बंधित अंग और रोग बुध मुख्यतः वाणी विकार, गुप्त रोग, नपुंसकता और त्वचा संबंधी रोगों का कारण बनते हैं। जब जन्मकुंडली में बुध लग्नेश व रोग भाव के स्वामी के साथ हो तो जातक को पेट संबंधी रोग, भोजन Read more
मंगल सम्बंधित अंग और रोग मंगल अग्नि तत्व कारक एंव उग्र स्वभाव का ग्रह है। अशुभ स्थिति में होने पर किसी का भी विध्वंस कर देना इसका स्वभाव है। क्योंकि मंगल को पापी ग्रहों में शामिल किया गया है। अग्नि Read more
चन्द्र सम्बंधित अंग और रोग जन्मकुंडली में 4, 6, 8 अथवा 12 वें भाव में चन्द्रमा हो, तो निश्चित ही रोग कारक बनते है। चन्द्रमा के पापी अथवा पीडित होने की स्थिति में जातक को खांसी, जुकाम, फेंफड़ों के रोग, Read more