हथेली पर पर्वतों की स्थितियां और उनकी विशेषताएं

मैं हाथ के पर्वतों अथवा ग्रह क्षेत्रों को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मानता हूं, क्योंकि मैं यह समझता हूं कि व्यक्ति द्वारा किये गये शारीरिक श्रम का उसके हाथ की चमड़ी को खुरदरा, सख्त अथवा मोटा बनाने में बड़ा हाथ होता है। यद्यपि उससे इन पर्वतों या ग्रह क्षेत्रों के घटने बढ़ने या उभरने व पिचकने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, तथापि ये क्षेत्र व्यक्ति की चरित्रगत अथवा वंशपरम्परा से प्राप्त विशेषताओं को दर्शाते हैं। इन क्षेत्रों या पर्वतों को ग्रहों के अनुसार विभिन्न नाम दिये गये हैं। हो सकता है उन क्षेत्रों पर उन ग्रहों का प्रभाव हो, लेकिन हाथ की परीक्षा करते समय मैं ग्रहों के प्रभावों के विचार को उचित नहीं समझता ।

हस्तरेखा विज्ञान अपने आपमें पूर्ण है, लेकिन मैं यह आवश्यक नहीं मानता कि हाथ के अध्ययन को ज्योतिष विद्या के साथ जोड़कर ही देखा जाए। मैं इन पर्वतों को ग्रहों के साथ दिये नाम केवल इसलिए प्रयोग में लाता हूं कि पाठक इनका परिचय तुरन्त पा सकें। ग्रहों के गुण इन नामों के साथ हमारे मस्तिष्क में इतने अधिक समय से जुड़े हुए हैं कि इन नामों का उल्लेख करने से ही हमें इन ग्रहों की विशेषताओं का आभास हो जाता है। इसके अतिरिक्त नामों के इस प्रयोग का एक लाभ यह भी है कि पर्वतों को पहला, दूसरा व तीसरा कहने की बजाय उनके नामों से पुकारना अधिक सरल प्रतीत होता है।

शुक्र पर्वत

यह पर्वत या क्षेत्र अंगूठे के मूल स्थान के नीचे होता है। यदि यह पर्वत सामान्य रूप से विकसित हो तो यह एक अनुकूल चिह्न माना जाता है, तथा इसका सम्बन्ध प्यार, प्रसन्नता की इच्छा, कला, भावनात्मक सम्बन्ध तथा सौन्दर्य का पुजारी आदि रूपों में माना जाता है। यह क्षेत्र हाथ की सबसे अधिक रक्तवाहिकाओं द्वारा आच्छादित होता है। अतः यदि यह क्षेत्र उन्नत और विकसित हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य भी उत्तम होता है। यदि यह क्षेत्र छोटा अथवा सामान्य से कम उन्नत या दबा हुआ या अविकसित हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्यं ठीक नहीं रहता तथा उसके अन्दर कामशक्ति की भी कमी होती है। यदि यह क्षेत्र असामान्य रूप से बड़ा या उभरा हुआ हो तो व्यक्ति के विपरीत लिंग के प्रति आकृष्ट होने का सूचक होता है।

गुरु पर्वत

यह क्षेत्र तर्जनी की जड़ के नीचे होता है। यदि यह क्षेत्र समुचित रूप से उन्नत हो तो व्यक्ति महत्त्वाकांक्षी, स्वाभिमानी, स्फूर्तियुक्त एवं शासन करने का इच्छुक होता है। यदि व्यक्ति के हाथ में यह क्षेत्र अविकसित अथवा चपटा या धंसा हुआ हो तो वह बड़ों के प्रति श्रद्धा नहीं रखता और न उसके मन में किसी प्रकार का धार्मिक विश्वास ही होता है। यदि यह क्षेत्र अधिक उन्नत हो तो व्यक्ति अहंकारी भी हो सकता है।

पर्वत उनकी स्थितियां व विशेषताएं

शनि पर्वत

मध्यमा की जड़ के नीचे जो स्थान होता है उसे शनि पर्वत या शनि का क्षेत्र कहा जाता है। यह क्षेत्र व्यक्ति के एकान्तप्रिय, शान्त, कम बोलने, बुद्धि तथा गम्भीर विषयों के प्रति लगाव का सूचक होता है।

सूर्य पर्वत

यह क्षेत्र अनामिका की जड़ के नीचे स्थित होता है। यदि यह क्षेत्र सुविकसित हो तो व्यक्ति सभी सुन्दर वस्तुओं के प्रति प्रशंसा का भाव रखता है, भले ही उसमें उन वस्तुओं के समझने की बुद्धि न हो। इस क्षेत्र से चित्रकला, कविता, साहित्य, तथा संगीत एवं उच्च विचारों के प्रति भी व्यक्ति का रुझान इंगित होता है।

बुध पर्वत

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यह क्षेत्र कनिष्ठिका की जड़ के नीचे स्थित होता है तथा व्यक्ति की यात्राओं, त्वरित बुद्धि एवं विचारों की अभिव्यक्ति का विश्लेषण करता है। यदि हाथ के अन्य लक्षण भी अनुकूल हों तो इस क्षेत्र के गुण व्यक्ति के लिये कल्याणकारी सिद्ध होते हैं।

मंगल पर्वत

यह क्षेत्र हाथ में दो स्थानों पर होता है। एक बृहस्पति क्षेत्र के नीचे, जीवन रेखा के भीतर व शुक्र पर्वत के बगल में। यह क्षेत्र व्यक्ति में साहस, युद्धप्रियता, कलह एवं उसके लड़ाकू स्वभाव का द्योतक होता है। दूसरे स्थान पर यह क्षेत्र बुध एवं चन्द्र पर्वत के बीच में मिलता है, जो व्यक्ति के निष्चेष्ट साहस, आत्मसंयम एवं प्रतिरोधक शक्ति का सूचक होता है।

चन्द्र पर्वत

चन्द्र पर्वत मंगल के दूसरे क्षेत्र के नीचे तथा शुक्र पर्वत के ठीक सामने होता है। इससे व्यक्ति की कल्पनाशीलता, सौन्दर्यप्रियता तथा काव्य एवं साहित्य आदि के प्रति रुचि का पता चलता है।

पर्वतों का एक-दूसरे के प्रति झुकाव

कभी-कभी हाथों के ये पर्वत अपने स्थान पर न होकर इधर-उधर खिसके हुए होते हैं और तब उनमें जो गुण विकसित होते हैं वे दूसरे पर्वत या क्षेत्र के गुणों के साथ मिलकर पैदा होते हैं।

उदाहरण के लिये यदि शनि पर्वत गुरु पर्वत की ओर झुका हुआ हो तो यह व्यक्ति में बुद्धिमत्ता, उदासी तथा उसकी धार्मिक वृत्ति का परिचायक होता है। यदि शनि पर्वत सूर्य पर्वत की ओर झुका दिखाई दे तो व्यक्ति में कलाप्रियता आदि गुणों का विकास हो जाता है अथवा यदि सूर्य पर्वत का झुकाव बुध पर्वत की ओर हो तो व्यक्ति की कलाप्रियता उसके व्यापारिक एवं वैज्ञानिक क्षमता को प्रमाणित करती है।

हस्तरेखा विज्ञान

  1. हाथों की बनावट और प्रकार
  2. अंगूठे की बनावट और प्रकार
  3. हाथ की रेखाएं
  4. हथेली पर पर्वतों की स्थितियां और उनकी विशेषताएं
  5. उंगलियां एवं उंगलियों के जोड़
  6. नाखूनों द्वारा स्वभाव का ज्ञान
  7. जीवन रेखा का फलादेश
  8. हृदय रेखा का फलदेश
  9. मस्तिष्क रेखा का फलदेश
  10. भाग्य रेखा का फलदेश
  11. सूर्य रेखा का फलदेश
  12. विवाह रेखा और सन्तान रेखा
  13. स्वास्थ्य रेखा का फलदेश
  14. हथेली पर नक्षत्र चिह्न
  15. हथेली पर क्रॉस का निशान
  16. हथेली पर बृहत् त्रिकोण और चतुष्कोण
  17. हथेली पर यात्रा रेखा और दुर्घटना रेखा
  18. आत्महत्या और हत्या करने वालों का हाथ
  19. हथेली पर पागलपन की रेखायें
  20. हस्तरेखा में समय विभाजन की विधि
  21. हाथ किस प्रकार देखना चाहिये

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