मकर लग्न में चंद्रमा का फलदेश

मकर लग्न में चंद्रमा का फलदेश मकर लग्न में चंद्रमा का फलदेश प्रथम स्थान में मकरलग्न में चंद्रमा सप्तमेश है। मारक स्थान का स्वामी होने से उसे यहां अल्पदोष है, क्योंकि यह शनि से सम भाव रखता है। चंद्रमा यहां प्रथम स्थान में मकर (शत्रु) राशि में होगा। जातक सुन्दर, Read more

मकर लग्न में सूर्य का फलादेश

मकर लग्न में सूर्य का फलादेश मकर लग्न में सूर्य का फलादेश प्रथम स्थान में मकरलग्न में सूर्य अष्टमेश होने से अशुभ है। सूर्य शनि का शत्रु होने से अशुभ ग्रहों के सान्निध्य से कभी-कभी मारक का काम भी करेगा। संहिता ग्रंथों के अनुसार सूर्य को यहां अष्टमेश का दोष Read more

कुंडली के बारहवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के बारहवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश जीवन में वही व्यक्ति सफल हो सकता है जो आय एवं व्यय का सही सन्तुलन रख सके। आवश्य के उचित अनुपात से ही समाज में जातक की ख्याति एवं प्रतिष्ठा होती है। अतः ज्योतिष के प्रेमियों को चाहिए कि Read more

कुंडली के ग्यारहवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के ग्यारहवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश एकादश भाव जन्मकुण्डली में अपना ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि मानव-जीवन सुचारु रूप से तभी चल सकता है, जबकि मानव के पास आय के अच्छे स्रोत हो। यदि आय ठीक नहीं होगी तो मानव जीवन अस्तव्यस्त-सा हो जाएगा। Read more

कुंडली के दसवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के दसवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश ज्योतिष ग्रन्थों में दशम भाव को सर्वाधिक महत्ता दी गई है, क्योंकि जीवन का आधार कर्म है और कर्म का हेतु दशम भाव है, इसलिए दशम का सूक्ष्म विवेचन प्रत्येक ज्योतिषी बन्धु के लिए आवश्यक धर्म माना जाता है। Read more

कुंडली के नवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के नवें भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश वस्तुतः नवम भाव कुण्डली का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भाव है, क्योंकि मानव का आधार उसका भाग्य है । यद्यपि शास्त्रों में पुरुषार्थ को महत्ता प्रदान की है, परन्तु भाग्य के बिना पुरुषार्थ भी श्री-हीन हो जाता है। नवम भाव मुख्यतः Read more

कुंडली के आठवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के आठवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश लग्न से आठवाँ स्थान अष्टम भाव कहलाता है। इस भाव से उम्र, पुरस्कार, बिना कमाया हुआ धन, लाटरी, मृत्यु का कारण, मृत्यु का समय, अवनति, राज्यभंग तथा मृत्यु के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी मिलती है। अष्टम भाव का विवेचन Read more

कुंडली के सातवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के सातवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश कुण्डली के बारहों भाव की रचना महर्षियों ने बहुत सोच-विचार कर की है, लेकिन संसार में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है – मानव के स्वयं का अस्तित्व । यदि वह स्वयं नहीं है तो फिर संसार के सभी पदार्थ उसके लिए Read more

कुंडली के छठे भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के छठे भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश षष्ठ भाव से मुख्यतः रोग, शत्रु, व्यसन, चोट, घाव, एक्सीडेंट, बीमारी, मानसिक असन्तुलन, माता का दुर्भाग्य, पुत्र एवं भाई का दुर्भाग्य आदि का विचार किया जाता है। ऋण एवं ननिहाल का विचार भी छठे भाव से ही किया जाता Read more

कुंडली के पांचवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के पांचवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश जन्मकुण्डली में पंचम भाव का विशेष महत्त्व है, क्योंकि यह पहला त्रिकोण स्थान है। दूसरे यह कि इस भाव से विद्या व शिक्षा का अध्ययन किया जाता है। चूंकि विद्या ही मानव प्रगति की आधारशिला है, फलस्वरूप इस भाव Read more