कुंडली में विदेश यात्रा के योग

ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुण्डली के तृतीय, नवम तथा द्वादशवें भाव द्वारा यात्रा के बारे में विचार किया जाता है। तृतीय भाव से छोटी यात्राओं, नवम भाव से लम्बी तथा धार्मिक यात्राओं तथा द्वादशवें भाव से विशेष रूप से विदेश यात्रा के बारे में अध्ययन किया जाता है। इन भावों Read more

कुंडली से जानें विवाह नहीं होने का कारण और निवारण

यदि जातक का विवाह नहीं हो तो सर्वप्रथम यह देखना चाहिए कि उसकी कुण्डली में ऐसा क्या योग है कि विवाह नहीं हो रहा है । विवाह, दाम्पत्य जीवन, स्त्री संबंध और यौन-सुख इन विचारों के साथ ही सप्तम भाव, सप्तमेश, सप्तम भाव कारक शुक्र का भी ध्यान किया जाना Read more

कुंडली का बाधक ग्रह

कुंडली का बाधक ग्रह फलादेश करते समय कुण्डली के बाधक ग्रहों पर भी ध्यान देना जरूरी है। ज्योतिष में बाधक ग्रहों की बड़ी भारी भूमिका होती है। प्रायः जन्मकुण्डली में उच्च के ग्रह दिखाई देते हैं। लेकिन राजयोग कारक ग्रह की दशा में राजयोग फलीभूत नहीं हो रहा है। धनेश Read more

गोचर से फलित कैसे करें ?

गोचर से फलित कैसे करें ? आचार्यों ने कुंडली से फलित देखने के सूत्रों की रचना के उपरांत घटनाओं के घटित होने का काल तय करने के लिए एक पृथक् पद्धति की आवश्यकता अनुभव की। इसे आप इस प्रकार समझें कि एक जन्मांग में विवाह का योग देखना है। सामान्य Read more

राजयोग कैसे बनते हैं ?

राजयोग कैसे बनते हैं ? मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं के अध्ययन क्रम में राजयोग यद्यपि अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसमें एक आकर्षण अवश्य है । सामान्यतया सभी पुस्तकों में राजयोग का उल्लेख रहता है। यह इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि स्वतंत्रता के बाद भारत में भी अब आम आदमी Read more

भाग्योदय कब होगा ?

भाग्योदय कब होगा ? प्रत्येक मनुष्य की इच्छा होती है कि वह सभी भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करे। जब इन इच्छित भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होने लगती है, तो इसी स्थिति को ज्योतिष की भाषा में भाग्योदय कहते हैं । दूसरे शब्दों में जब व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इच्छाओं को Read more

आयु के कारक भाव और ग्रह

आयु निर्णय का सबसे अधिक महत्त्व है अर्थात् सर्वप्रथम आयु विचारणीय है। विद्या, विवाह, संतान, सुख, राजयोग और दूसरे सभी शुभाशुभ योगों पर विचार आयु के उपरांत ही करना चाहिए। लगभग सभी प्राचीन ग्रंथों में आयु के संबंध में गंभीरता से लिखा है। सभी आचार्यों ने बालारिष्ट योगों का उल्लेख Read more

रहस्यमय ग्रह है शनि

रहस्यमय ग्रह है शनि शनि को रहस्यपूर्ण ग्रह माना गया है । हिमालय की गुफाओं में निरंतर साधनारत अघोरी और प्रेत-आत्माओं को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले तंत्र के पंडित शनि से प्रभावित रहते हैं। रहस्यमयी विद्याओं पर शनि के बाद केतु का प्रभाव है । शव साधक इन दोनों Read more

कुंडली से रोगों का निर्णय

कुंडली से रोगों का निर्णय जैसा कि हम अध्ययन कर चुके हैं कि कुंडली का समग्र अवलोकन ही उचित निर्णय दे सकता है। किसी एक योग के आधार पर घोषणा करना उचित नहीं है। रोगों के मामले में मेरी इस धारणा को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि प्रायः रोगों को Read more

संतान और संतान सुख

संतान और संतान सुख विवाह की सार्थक परिणति संतान है। अधिकतम मामलों में ऐसा होता भी है। मगर कुछ दंपती संतान का सुख नहीं भोग पाते हैं। चिकित्सकीय भाषा में कहना चाहिए कि ये लोग शारीरिक दृष्टि से संतान प्राप्ति के योग्य नहीं होते । बिना किसी आधुनिक जांच के Read more