कुंडली से रोजगार का चुनाव

कुंडली से रोजगार का चुनाव अपनी योग्यताओं और क्षमताओं के अनुसार व्यक्ति अपनी आजीविका के साधन को चुनता है। इसके बावजूद कई बार उसे अपने व्यवसाय में परिवर्तन करना पड़ता है। इसके कई कारण हैं, लेकिन प्रमुख कारण है अपने अनुकूल या लाभदायक व्यवसाय का चयन न कर पाना। लगभग Read more

कुंडली से जीवनसाथी का चुनाव

कुंडली से जीवनसाथी का चुनाव भारतीय समाज में विवाह को एक प्रमुख संस्कार माना गया है। इसके बिना जीवन को अपूर्ण समझा जाता है। अब से कुछ वर्षों पहले तक एक निश्चित आयु में अभिभावक अपनी संतान के विवाह को संपन्न करने के प्रयास में लग जाते थे। अधिसंख्य विवाह Read more

कुंडली से सुंदरता का आंकलन

कुंडली से सुंदरता का आंकलन सुंदरता तो देखने वाले की आंखों में होती है। वर्तमान में इस मुहावरे के क्या मायने हैं, यह किसी से छिपा नहीं है । अब सुंदरता के मापदंड बदल गए हैं या तय हो गए हैं। यद्यपि माना जाता है कि सौंदर्य का दर्जा गुणों Read more

कुंड्ली का वर्गीकृत फलित

कुंड्ली का वर्गीकृत फलित इसके पहले के अध्याय में फलित की जो विधि लिखी गई है, उसमें कुंडली के समग्र अध्ययन पर बल दिया गया है अर्थात् किसी भी प्रकार का फल देखने से पूर्व हमें कुंडली के बल को देख लेना चाहिए। इसके लिए कुछ प्रमुख योगों पर भी Read more

दशाफल

दशाफल भारतीय फलित ज्योतिष में अनेक प्रकार की दशाओं का उल्लेख है, लेकिन विंशोत्तरी, अष्टोत्तरी और योगिनी प्रमुख दशा पद्धतियां मानी गई हैं। दक्षिण भारत में अष्टोत्तरी दशा का अधिक प्रचलन है, किंतु समूचे उत्तर भारत में विंशोत्तरी दशा का ही उपयोग प्रमुखता से होता है। यहां हम विंशोत्तरी दशा Read more

अस्त ग्रह

अस्त ग्रह अस्त ग्रह उनको कहते हैं, जो कि सूर्य से एक निश्चित अंशों पर स्थित हों । सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है। वास्तव में यह ग्रह नहीं है, लेकिन फलित ज्योतिष में इसे ग्रह की संज्ञा दी गई है और ग्रहों में इसे राजा माना जाता Read more

सूर्य लग्न, चंद्र लग्न और उदय लग्न के बलाबल

सूर्य लग्न, चंद्र लग्न और उदय लग्न के बलाबल भारतीय फलित ज्योतिष में चंद्रमा को दूसरे लग्न की संज्ञा दी गई है। पहला उदय लग्न है और तीसरा सूर्य लग्न । सूर्य लग्न, चंद्र लग्न और उदय लग्न क्रमशः अधिकाधिक बली हैं । भारतीय ज्योतिष में लग्न के संबंध में Read more

नव ग्रहों के कारकत्व

नव ग्रहों के कारकत्व किसी विषय का भावों के अनुसार आकलन कर चुकने के पश्चात्, उस विषय के कारक ग्रह की शुभाशुभ स्थिति का विचार भी कर लेना चाहिए। फलित के सामान्य नियमों के अनुसार भाव और भावेश को प्रधानता दी जाती है । दूसरा स्थान कारक ग्रह का है। Read more

लग्न और लग्नेश

लग्न और लग्नेश भावों में लग्न सबसे महत्त्वपूर्ण है । यदि लग्न बलहीन है, तो दूसरे सभी योग सीमित फल ही दे पाते हैं। सही अर्थों में तो शुभ और कारक योगों के फल न्यूनतम मिलते हैं और अशुभ योग हावी रहते हैं । जातक की शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं Read more

कुंडली का सामान्य फलित

कुंडली का सामान्य फलित ज्योतिष एक लचीला विज्ञान है, इसका कोई भी सिद्धांत अंतिम सत्य नहीं है । आपकी फलित पर प्राथमिक जानकारी बढ़ने के साथ ही आप अपने को एक चौराहे पर खड़ा पाएंगे, जहां आपको अपने गंतव्य के चार मार्ग तो दिखाई देंगे, लेकिन यह आसानी से स्पष्ट Read more