भावार्थ रत्नाकर | भाग्य योग | राज योग

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 8 | भाग्य योग 1. भाग्माधिपो लाभगे वा लाभेशो भाग्यगो यदि । लाभ भाग्याधिपत्योश्च संबन्धे भाग्यमादिशेत् ॥ १ ॥ भावार्थ – यदि नवम भाव का स्वामी एकादश भाव में हो अथवा एकादश भाव का स्वामी नवम Read more

भावार्थ रत्नाकर | स्त्री और काम | आयु और स्वास्थ्य

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 6 | स्त्री और काम 1. कलत्राधिपतिर्यस्तु कारकेण युतो यदि । क्रूरसंबन्ध रहितः कलत्रं चैकमेव हि ॥ १ ॥ भावार्थ – सप्तम भाव का स्वामी क्लत्र कारक शुक्र के साथ यदि (पुरुष की जन्म कुण्डली में) Read more

भावार्थ रत्नाकर | भ्रातृ-भाव | वाहन तथा भाग्य | शत्रु-रोग

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 3 | भ्रातृ-भाव 1. भ्रातृस्थानेश्वरस्यापि भ्रातृणां कारकेण वै। कूजेन सह संबन्धे भ्रातृ द्विस्वीरिता ॥ १ ॥ भावार्थ – यदि तृतीय भाव का स्वामी भ्रातृकारक मंगल के साथ युति अथवा दृष्टि से सम्बन्धित हो, तो भाइयों की Read more

भावार्थ रत्नाकर | धन योग | निर्धनता के योग | खान-पान

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 2 | धन योग 1. धनेशे पञ्चमस्थे च पञ्चमेशो घने यदि । धनपे लाभगे वापि लाभेशो धनगो यदि । पञ्चमेश पंचमे वा भाग्ये भाग्याधिपो यदि । विशेष धन योगाश्चेत्याहुर्जातकको विदाः ॥ १,२ ॥ भावार्थ – यदि Read more

भावार्थ रत्नाकर | मकर लग्न | कुंभ लग्न

मकर लग्न 1. मकरे जायमानस्य अष्टमस्थो भवेद्बधः । लग्नसंस्थो यदि गुरु शुक्रेण च निरीक्षितः । दीर्घायुर्योगमाप्नोति जातस्तत्र न संशयः । निर्धनश्च भवेज्नातोद्यत्रापि च न संशयः ॥ १,२ ॥ भावार्थ – यदि मकर लग्न हो, बुध अष्टम भाव में हो और Read more

भावार्थ रतनाकर | धनु लग्न | मीन लग्न

धनु लग्न 1. धनुर्लग्ने तु जातस्य पञ्चमस्थ शनेर्दशा । शुभप्रदायोगदेति वदन्ति विभुदोत्तमाः ॥ १ ॥ भावार्थ – पंचम भाव में मेष राशि में स्थित शनि की दशा में धनादि प्राप्ति का शुभ फल होता है । व्याख्या – शनि की Read more

भावार्थ रत्नाकर | कर्क लग्न | सिंह लग्न

कर्क लग्न 1. कर्किजातस्य च गुरुविशेषेण न योगदः । मकरे जायमानस्य बुधो योगप्रदो भवेत् ॥ १ ॥ भावार्थ – कर्क लग्न के जातकों के लिए गुरु कोई विशेष धनदायक सिद्ध नहीं होता, परन्तु मकर लग्न वालों के लिए बुध विशेष Read more

भावार्थ रत्नाकर | मिथुन लग्न | कन्या लग्न

मिथुन लग्न 1. तृतीयस्थौ रविबुध बुधचाये समागमे । बुधो योगप्रदस्सत्यं युग्मजातस्य भाग्यदः ॥१॥ भावार्थ – यदि मिथुन लग्न में जन्म हो और सूर्य और बुध तृतीय भाव में स्थित हों, तो बुध अपनी दशा भुक्ति में बहुत धनदायक आदि सिद्ध Read more

भावार्थ रत्नाकर | वृषभ लग्न | तुला लग्न

वृषभ लग्न 1. वृषभजातस्य च शनिः भाग्यकर्मेश्चरोऽपि वा । सोमसुताभ्याम् वा न युक्रतौ नैव योगदः ॥ १ ॥ भावार्थ – वृषभ लग्न में जन्म हो, तो शनि केन्द्र (दशम) तथा त्रिकोण (नवम) का स्वामी होता हुआ भी योग (बहुत शुभ) Read more

भावार्थ रत्नाकर | मेष लग्न | वृश्चिक लग्न

मेष लग्न 1. मेषलग्ने तु जातस्य राजयोगीऽपि लभ्यते । चतुर्थ पञ्चमाधीश संबन्धेन न संशयः ॥ १ ॥ भावार्थ – मेष लग्न में जन्म लेने वालों की जन्म कुण्डली में यदि चतुर्थ और पंचम भाव के स्वामियों का परस्पर (दृष्टि योग Read more