भावार्थ रत्नाकर | भाग्य योग | राज योग
भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 8 | भाग्य योग 1. भाग्माधिपो लाभगे वा लाभेशो भाग्यगो यदि । लाभ भाग्याधिपत्योश्च संबन्धे भाग्यमादिशेत् ॥ १ ॥ भावार्थ – यदि नवम भाव का स्वामी एकादश भाव में हो अथवा एकादश भाव का स्वामी नवम Read more









