औषधियों द्वारा ग्रह शांति

औषधियों द्वारा ग्रह शांति हमारे पुरातन ऋषियों और मुनियों का विश्वास था कि हमारी जन्मपत्री में विभिन्न ग्रहों की त्रिक भाव में स्थिति या अशुभ अर्न्तदशा के समय वे हमें दुःख और दुर्भाग्य प्रदान करते हैं। उनका यह भी विश्वास Read more

रंगों द्वारा ग्रह शांति

रंगों द्वारा ग्रह शांति अति प्राचीन समय से मानव के आचरण को व्यवस्थित करने में रंग एक मजबूत तथा सूक्ष्म शक्ति रहे हैं। हमारे चारों ओर प्रकृति में इतना रंग फैला पड़ा है कि आदि मानव न केवल इसकी विभिन्नता Read more

रत्नों द्वारा ग्रह शांति

रत्नों द्वारा ग्रह शांति आजकल कीमती पत्थरों या रत्नों को अंगुठियों में जड़वाने का एक फैशन सा हो गया है जिसे संबंधित व्यक्ति को पहनना पड़ता है। कभी-कभी क्रिया हास्यास्पद स्थितियों तक पहुंच जाती है। हमने व्यक्तियों को आठ-आठ अंगुठियां Read more

यंत्र द्वारा ग्रह शांति

यंत्र द्वारा ग्रह शांति पिछले अध्यायों में हमने मंत्रों, तंत्रों तथा भक्ति से उत्पन्न होने वाली विभिन्न तरंगों के बारे में बात की। इनके पश्चात हम यंत्रों की शक्ति पर आते हैं जिसने ज्योतिषियों द्वारा भाग्य की अशुभ धाराओं के Read more

दान द्वारा ग्रह शांति

दान द्वारा ग्रह शांति मत्स्य पुराण के अनुसार सर्वेषाम् उपायानां दानं श्रेष्ठतमं मतम बचाव के सभी निर्धारित उपायों में से, दान सबसे श्रेष्ठ है । व्यक्तियों को वांछित फल मिल सकता है तथा दान से किसी पर भी विजय प्राप्त Read more

व्रत द्वारा ग्रह शांति

व्रत द्वारा ग्रह शांति आजकल जीवन की गति बहुत तेज है। हमारे पास बहुत से काम करने का समय ही नहीं होता और हमें समय की कमी के कारण इन्हें स्थगित करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति के पास Read more

मंत्र द्वारा ग्रह शांति

मंत्र द्वारा ग्रह शांति सबसे अधिक शक्तिशाली तथा अचूक रक्षक उपाय है भक्ति तथा ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना, जिसके विषय में पहले विचार किया जा चुका है। यहां हम एक और समान रूप से महत्वपूर्ण तथा लगभग उसी Read more

भक्ति द्वारा ग्रह शांति

भक्ति द्वारा ग्रह शांति किसी भी उत्तम भवन को देखकर उसके निर्माता को प्रत्यक्ष न देखकर भी अनुभव के द्वारा उसके रचयिता का निश्चय होता है । दार्शनिक पद्धत्ति के अनुसार कोई भी कार्य ज्ञानवान, इच्छावान क्रियावान् कर्ता के बिना Read more

ज्योतिष तथा कर्म

ज्योतिष तथा कर्म कर्म संस्कृत का शब्द है, “कृ” से अर्थ है “कार्य या काम” । कोई भी मानसिक या शारीरिक कार्य कर्म कहलाता है। न्यूटन ने कहा था “प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है” । अतः कर्म के नियम Read more

केतु का रत्न लहसुनिया कब, किसे व कैसे धारण करना चाहिए?

केतु-रत्न या लहसुनिया को लहसनिया, संस्कृत में सूत्रमणि अथवा वैदूर्य, फारसी में वंडर तथा अंग्रेजी में ‘कैट्स आई स्टोन’ (Cat’s Eye Stone) कहते हैं। इस मणि में सफेद धारियाँ पाई जाती हैं । दो, तीन अथवा चार धारियाँ होना साधारण Read more