राशियों का वर्गीकरण

राशियों का वर्गीकरण राशियां जातक की मनोवृत्ति की सूचक हैं। वे चर, स्थिर और द्विस्वभाव होती हैं। चर राशियां – मेष, कर्क, तुला और मकर स्थिर – वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ द्विस्वभाव – मिथुन, कन्या, धनु, मीन 1. चर राशि जातक बहिर्मुखी, सामाजिक, सक्रिय होते हैं तथा परिवर्तन पसंद करते Read more

प्रश्न ज्योतिष क्या है ?

प्रश्न ज्योतिष क्या है ? प्रश्न ज्योतिष एक ज्योतिषीय विधि है जो तत्काल या महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रयोग की जाती है. यह जन्म कुंडली के बिना, या जब तत्काल प्रश्न का उत्तर जानना हो, तो उपयोगी होती है।  प्रश्न ज्योतिष में, प्रश्नकर्ता का प्रश्न पूछने का Read more

कुंडली में विदेश यात्रा के योग

ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुण्डली के तृतीय, नवम तथा द्वादशवें भाव द्वारा यात्रा के बारे में विचार किया जाता है। तृतीय भाव से छोटी यात्राओं, नवम भाव से लम्बी तथा धार्मिक यात्राओं तथा द्वादशवें भाव से विशेष रूप से विदेश यात्रा के बारे में अध्ययन किया जाता है। इन भावों Read more

कुंडली से जानें विवाह नहीं होने का कारण और निवारण

यदि जातक का विवाह नहीं हो तो सर्वप्रथम यह देखना चाहिए कि उसकी कुण्डली में ऐसा क्या योग है कि विवाह नहीं हो रहा है । विवाह, दाम्पत्य जीवन, स्त्री संबंध और यौन-सुख इन विचारों के साथ ही सप्तम भाव, सप्तमेश, सप्तम भाव कारक शुक्र का भी ध्यान किया जाना Read more

भाग्यवर्धक अंक यंत्र

भाग्यवर्धक अंक यंत्र अंक यंत्रों से लाभ प्राप्त करने के लिए इन यंत्रों से बनी अंगूठियों को मैंने बहुत ही प्रभावशाली पाया है। इनके पीछे क्या वैज्ञानिक आधार है, यह अंगूठियाँ कैसे कार्य करती हैं, अब तक अबूझा है । अंकों का ईश्वरीय सत्ता के साथ सम्बन्ध, इनकी पीड़ा पहुँचाने Read more

सुखी जीवन के लिये टोटके और मंत्र

सुखी जीवन के लिये टोटके और मंत्र काम न मिलने पर अगर आप कार्य की कमी से दुखी और परेशान रहते हैं और आप काफी हीन भावना का अनुभव करने लगे हैं तो यह सरल सा टोटका अपनायें! इसके प्रभाव से काम मिलने लगेगा। एक बेदाग बड़ा सा पीला नींबू Read more

भाग्यवर्धक स्वर विज्ञान

ज्ञान का शिरोमणि स्वर योग ज्ञान नई पीढ़ी के लिए सर्वथा अछूती वस्तु है । कुछ-एक योगाभ्यासियों को छोड़कर अन्य प्रत्येक के लिए इसका ज्ञान और अभ्यास करवाना आज आवश्यक है । क्योंकि इससे अधिक सहज, सरल, कल्याणकारी एवं उपयोगी ज्ञान अन्य कोई नहीं है । इस विज्ञान की सबसे Read more

भावर्थ रत्नाकर | नियम अध्याय

भावर्थ रत्नाकर | नियम अध्याय नियम १ : जिन भावों के स्वामी उन भावों के कारकों के साथ संयुक्त हों, उनकी वृद्धि होती है। (अध्याय १२, श्लोक १) नियम २ : कोई भी कारक ग्रह यदि उस भाव में स्थित हो जिसका कि वह कारक है तो उस भाव का Read more

भावार्थ रत्नाकर | साधारण योग | ग्रहमालिका योग

भावार्थ रत्नाकर अध्याय 13 | साधारण योग 1. ततद्भावेश्वराः खेटा: तत्तत्कारक संयताः । तस्य भावस्य सर्वस्य प्राबल्यं प्रोच्यते बुधः ॥ १ ॥ भावार्थ – यदि किसी भाव का स्वामी उसी भाव के कारक के साथ स्थित हो तो इस योग द्वारा उस भाव की वृद्धि कहनी चाहिये जिस भाव के Read more

भावार्थ रत्नाकर | दशा के परिणाम

भावार्थ रत्नाकर अध्याय 12 | दशा के परिणाम 1. शुक्रान्तरे शनेये शुक्रदाये तथा शने । अन्तर्द्दशायां संप्राप्ते योगहीनो भवेन्नरः ॥ १ ॥ भावार्थ – शनि की दशा में शुक्र की भुक्ति और शुक्र की दशा में शनि की भुक्ति हो तो मनुष्य की आर्थिक स्थिति खराब होती है । व्याख्या Read more