सूर्य सम्बंधित अंग और रोग

सूर्य सम्बंधित अंग और रोग जन्मकुंडली में सूर्यदेव का स्थान सर्वोपरि माना गया है। इसलिए शारीरिक रूप स्वस्थ्य रहने के लिए लग्नेश के साथ-साथ पुरुष के लिए सूर्यदेव का और स्त्री के लिए चन्द्रदेव का शुभ एंव बली बनकर बैठना Read more

रोग कारक ग्रह राशि और भाव

नवग्रहों से संबन्धित अंग और रोग ज्योतिष शास्त्र में राशियों की तरह अलग-अलग ग्रहों का भी अलग-अलग शारीरिक अंग एंव उनसे संबंधित रोगों के साथ स्थापित किया गया है। अतः नवग्रहों में सूर्य, चन्द्र आदि ग्रह जिस राशि में पीडित Read more

कुंड्ली में रोग देखने के स्वर्णिम सूत्र

कुंड्ली में रोग देखने के स्वर्णिम सूत्र ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर में कैसा भी रोग जन्म ले रोग की प्रकृति चाही कैसी भी क्यों न हो, उसका सीधा संबन्ध हमारे पूर्व संचित कर्मों के साथ अवश्य रहता है। Read more

विधवापन को हटाने वाला घट – विवाह

विधवापन को हटाने वाला घट – विवाह विवाह मेलापक करते समय ज्योतिष शास्त्र में मंगल का मिलान करना अति आवश्यक समझा जाता है वरना दोनों में से एक की मृत्यु हो जाती है। कई बार ऐसा होता है कि लड़का Read more

मंगलीक दोष कारण और निवारण

मंगलीक दोष कारण और निवारण आज के युग में जबकि विज्ञान की समृद्धि हुई तब पराविज्ञान की पराकाष्ठा का ह्रास हो गया है। जन्माक्षर तो क्वचित् ही लोगों के होते हैं और फिर दहेज प्रथा के दारुण भय से संत्रस्त Read more

सर्पशाप और कालसर्प योग

कालसर्प योग किसे कहते हैं? सामान्यतः जन्मकुण्डली के सारे ग्रह जब राहु और केतु के बीच में कैद हो जाते हैं, तो उस ग्रह स्थिति को ‘कालसर्प योग’ कहते हैं। राहु सर्प का मुख माना गया है और केतु इस Read more

काल सर्प योग शांति

कालसर्प योग एक ऐसा योग है, जिसके कारण फलित ज्योतिष की सत्यता अकाट्य रूप में प्रमाणित हुई है। यह योग जातक के जीवन के अन्य महत्त्वपूर्ण एवं गोपनीय रहस्यों को भी उद्घाटित करता है। हमारे नवीन शोध व अनुसंधान से Read more

क्यों विरोध करते हैं ज्योतिषी कालसर्प योग का?

क्यों विरोध करते हैं ज्योतिषी कालसर्प योग का? कालसर्प योग ज्योतिष जगत का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण, रोचक, चर्चित एवं विवादास्पद योग बन चुका है। कई विद्वानों के कालसर्प योग के समर्थन में बड़े-बड़े लेख लिखे हैं तथा इस योग की शान्ति Read more

कालसर्प योग का परिचय और प्रभाव

कालसर्प योग का परिचय यदि सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य में आ जाएं तो ‘कालसर्प योग’ की सृष्टि होती है। मोटे तौर पर कालसर्प योग दो प्रकार के होते हैं। एक उदित गोलार्द्ध और दूसरा अनुदित गोलार्द्ध। उदित Read more

कुंडली का बाधक ग्रह

कुंडली का बाधक ग्रह फलादेश करते समय कुण्डली के बाधक ग्रहों पर भी ध्यान देना जरूरी है। ज्योतिष में बाधक ग्रहों की बड़ी भारी भूमिका होती है। प्रायः जन्मकुण्डली में उच्च के ग्रह दिखाई देते हैं। लेकिन राजयोग कारक ग्रह Read more