भावार्थ रत्नाकर | तीर्थ स्नान | मृत्यु योग
भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 10 | तीर्थ स्नान 1. कर्मकारक देवेन्द्र पूजयस्य यदि विद्यते । संबन्ध कर्मनाथेन सत्कर्मनिरतो भवेत् ॥ १ ॥ भावार्थ – कर्मों के कारक गुरु का यदि युति दृष्टि आदि से दशम भाव के स्वामी से सम्बन्ध हो, तो जातक सदा सत्कर्म करने वाला होता है । Read more









