कुंडली के छठे भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के छठे भाव में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश षष्ठ भाव से मुख्यतः रोग, शत्रु, व्यसन, चोट, घाव, एक्सीडेंट, बीमारी, मानसिक असन्तुलन, माता का दुर्भाग्य, पुत्र एवं भाई का दुर्भाग्य आदि का विचार किया जाता है। ऋण एवं ननिहाल का विचार भी छठे भाव से ही किया जाता Read more

कुंडली के पांचवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

कुंडली के पांचवें भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश जन्मकुण्डली में पंचम भाव का विशेष महत्त्व है, क्योंकि यह पहला त्रिकोण स्थान है। दूसरे यह कि इस भाव से विद्या व शिक्षा का अध्ययन किया जाता है। चूंकि विद्या ही मानव प्रगति की आधारशिला है, फलस्वरूप इस भाव Read more

चौथे भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

चौथे भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश   चौथा भाव कुण्डली के बारह भावों में से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि जीवन का आनन्द, मुख-शांति, मस्तिष्क-मुख आदि का आधार यही भाव है। फलस्वरूप ज्योतिष के विद्यार्थियों को चाहिए कि वे इस भाव का सूक्ष्मतापूर्वक निरीक्षण करें और Read more

तीसरे भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

तीसरे भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश जातक की कुण्डली में तीसरा भाव उसकी आत्मा के रूप में होता है, क्योंकि बिना आत्मा या बल के शरीर मृतवत् है, ठीक उसी प्रकार बिना बली तृतीय भाव के जातक का जीवन भी निष्प्राण है, इसलिए तृतीय भाव का गहराई Read more

दूसरे भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

दूसरे भाव  में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश कुण्डली का द्वितीय भाव भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस भाव से संचित द्रव्य, पैत्रिक धन, कुटुम्ब मित्र, भाषण कला, सुख भोग, संचित पूँजी, मुत्यु के कारण, मृत्यु का स्थान आदि का ज्ञान होता है । आर्थिक मामलों का सम्बन्ध विशेषतः Read more

लग्न में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश

लग्न में सभी ग्रहों और राशियों का फलादेश प्रथम भाव अथवा लग्न कुण्डली में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाव है । लग्न ही समस्त भावों का ध्रुव केन्द्र और लग्न राशि का स्वामी लग्नेश ही कुण्डली का अधिपति माना जाता है । लग्नेश एवं लग्न राशि से जातक की शारीरिक गठन, वेशभूषा, Read more

हाथ में डाक्टर, इंजिनियर, अधिकारी बनने के योग

समाज के विभिन्न वर्गों के हाथ संसार में जितने भी पुरूष हैं, उनके हाथों में कुछ न कुछ विशेषता पाई जाती है। परन्तु अनुभव में ऐसा आया है कि एक विशेष वर्ग के व्यक्तियों के हाथों में एकरूपता या समानता पाई जाती है। नीचे की पंक्तियों में मैं समाज के Read more

हाथ की रेखाओं से जीवन की घटनाओं का समय निर्धारण

काल निर्धारण व्यक्ति के जीवन में ये प्रश्न निरन्तर चक्कर लगाते रहते हैं कि भाग्योदय कब होगा, किस प्रकार के कार्य से भाग्योदय होगा, भाग्योदय इसी देश में होगा या विदेश में होगा, विदेश यात्रा कब है, नौकरी कब मिलेगी, व्यापार में स्थिरता कब आ सकेगी, व्यापार में कितना लाभ Read more

हथेली पर पाये जाने वाले चिन्हों का महत्व

हस्त-चिन्ह रेखाओं के अलावा भी हाथ पर कई ऐसे चिन्ह होते हैं, जिनका अध्ययन भी अत्यन्त आवश्यक होता है। हथेली में पाए जाने वाले ऐसे चिन्ह प्रमुख रूप से आठ होते हैं। 1. त्रिभुज, 2. क्रॉस 3. बिन्दु 4. वृत्त 5. द्वीप, 6. वर्ग, 7. जाल, 8. नक्षत्र। अब मैं Read more

गौण रेखाएं

गौण रेखाएं हथेली में कई रेखाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें हम मुख्य रेखाएं तो नहीं कहते, परन्तु उनका महत्त्व किसी भी प्रकार से कम नहीं कहा जा सकता। इन रेखाओं का अध्ययन भी अपने आप में अत्यन्त जरूरी है। ये रेखाएं स्वतंत्र रूप से या किसी रेसा की सहायक बनकर Read more