भाग्यवर्धक स्वर विज्ञान

ज्ञान का शिरोमणि स्वर योग ज्ञान नई पीढ़ी के लिए सर्वथा अछूती वस्तु है । कुछ-एक योगाभ्यासियों को छोड़कर अन्य प्रत्येक के लिए इसका ज्ञान और अभ्यास करवाना आज आवश्यक है । क्योंकि इससे अधिक सहज, सरल, कल्याणकारी एवं उपयोगी Read more

भावर्थ रत्नाकर | नियम अध्याय

भावर्थ रत्नाकर | नियम अध्याय नियम १ : जिन भावों के स्वामी उन भावों के कारकों के साथ संयुक्त हों, उनकी वृद्धि होती है। (अध्याय १२, श्लोक १) नियम २ : कोई भी कारक ग्रह यदि उस भाव में स्थित Read more

भावार्थ रत्नाकर | साधारण योग | ग्रहमालिका योग

भावार्थ रत्नाकर अध्याय 13 | साधारण योग 1. ततद्भावेश्वराः खेटा: तत्तत्कारक संयताः । तस्य भावस्य सर्वस्य प्राबल्यं प्रोच्यते बुधः ॥ १ ॥ भावार्थ – यदि किसी भाव का स्वामी उसी भाव के कारक के साथ स्थित हो तो इस योग Read more

भावार्थ रत्नाकर | दशा के परिणाम

भावार्थ रत्नाकर अध्याय 12 | दशा के परिणाम 1. शुक्रान्तरे शनेये शुक्रदाये तथा शने । अन्तर्द्दशायां संप्राप्ते योगहीनो भवेन्नरः ॥ १ ॥ भावार्थ – शनि की दशा में शुक्र की भुक्ति और शुक्र की दशा में शनि की भुक्ति हो Read more

भावार्थ रत्नाकर | तीर्थ स्नान | मृत्यु योग

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 10 | तीर्थ स्नान 1. कर्मकारक देवेन्द्र पूजयस्य यदि विद्यते । संबन्ध कर्मनाथेन सत्कर्मनिरतो भवेत् ॥ १ ॥ भावार्थ – कर्मों के कारक गुरु का यदि युति दृष्टि आदि से दशम भाव के स्वामी से सम्बन्ध Read more

भावार्थ रत्नाकर | भाग्य योग | राज योग

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 8 | भाग्य योग 1. भाग्माधिपो लाभगे वा लाभेशो भाग्यगो यदि । लाभ भाग्याधिपत्योश्च संबन्धे भाग्यमादिशेत् ॥ १ ॥ भावार्थ – यदि नवम भाव का स्वामी एकादश भाव में हो अथवा एकादश भाव का स्वामी नवम Read more

भावार्थ रत्नाकर | स्त्री और काम | आयु और स्वास्थ्य

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 6 | स्त्री और काम 1. कलत्राधिपतिर्यस्तु कारकेण युतो यदि । क्रूरसंबन्ध रहितः कलत्रं चैकमेव हि ॥ १ ॥ भावार्थ – सप्तम भाव का स्वामी क्लत्र कारक शुक्र के साथ यदि (पुरुष की जन्म कुण्डली में) Read more

भावार्थ रत्नाकर | भ्रातृ-भाव | वाहन तथा भाग्य | शत्रु-रोग

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 3 | भ्रातृ-भाव 1. भ्रातृस्थानेश्वरस्यापि भ्रातृणां कारकेण वै। कूजेन सह संबन्धे भ्रातृ द्विस्वीरिता ॥ १ ॥ भावार्थ – यदि तृतीय भाव का स्वामी भ्रातृकारक मंगल के साथ युति अथवा दृष्टि से सम्बन्धित हो, तो भाइयों की Read more

भावार्थ रत्नाकर | धन योग | निर्धनता के योग | खान-पान

भावार्थ रत्नाकर | अध्याय 2 | धन योग 1. धनेशे पञ्चमस्थे च पञ्चमेशो घने यदि । धनपे लाभगे वापि लाभेशो धनगो यदि । पञ्चमेश पंचमे वा भाग्ये भाग्याधिपो यदि । विशेष धन योगाश्चेत्याहुर्जातकको विदाः ॥ १,२ ॥ भावार्थ – यदि Read more

भावार्थ रत्नाकर | मकर लग्न | कुंभ लग्न

मकर लग्न 1. मकरे जायमानस्य अष्टमस्थो भवेद्बधः । लग्नसंस्थो यदि गुरु शुक्रेण च निरीक्षितः । दीर्घायुर्योगमाप्नोति जातस्तत्र न संशयः । निर्धनश्च भवेज्नातोद्यत्रापि च न संशयः ॥ १,२ ॥ भावार्थ – यदि मकर लग्न हो, बुध अष्टम भाव में हो और Read more