कुंडली के चौथे भाव का महत्व
कुंडली के चौथे भाव का महत्व चतुर्थ भाव से नेतृत्व सफल या असफल, भूमि से लाभ, बदली, शत्रुता, पुत्र से सुख या दुःख, देश निकाला, विद्रोह, अचानक कष्ट आदि का विचार किया जाता है। 1. पागलपन – यदि चतुर्थ भाव Read more
कुंडली के चौथे भाव का महत्व चतुर्थ भाव से नेतृत्व सफल या असफल, भूमि से लाभ, बदली, शत्रुता, पुत्र से सुख या दुःख, देश निकाला, विद्रोह, अचानक कष्ट आदि का विचार किया जाता है। 1. पागलपन – यदि चतुर्थ भाव Read more
कुंडली के तीसरे भाव का महत्व तृतीय भाव से अनुसंधान, मित्रता, अचानक मृत्यु, लेखन कला, महान् धन, आत्मघात, विपरीत राजयोग, वायुयान यात्रा आदि का विचार किया जाता है। 1. निजत्व – मनुष्य अपने विचारों तथा भावनाओं को क्रियात्मक रूप देने Read more
कुंडली के दूसरे भाव का महत्व दूसरे भाव से रूप लावण्य, विद्या, कला, गूंगापन, गोद जाना, शासन आदि का विचार किया जाता है। 1. जैसे लग्न से चतुर्थ लग्न का अर्थात् निज (Self) का घर है, इसी प्रकार एकादश, अर्थात् Read more
कुंडली के पहले भाव का महत्व लग्न से जातक के रंग, रूप, कद, आकृति स्वभाव, सुख-समृद्धि, यश, मान, आजीविका आदि का विचार किया जाता है। लग्न और मनुष्य का स्वभाव मनुष्य के स्वभाव का विचार जहां चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा Read more
ग्रह परिचय सूर्य 1. सूर्य गर्मी देता है, यह सबका अनुभव है । अतः सूर्य को आग माना गया है । जब मंगल, केतु आदि अन्य अग्निद्योतक ग्रहों के साथ मिलकर सूर्य लग्न, लग्नेश, चन्द्र लग्न, चन्द्र लग्नेश आदि व्यवसाय Read more
ज्योतिष के कुछ विशेष नियम 1. जब मनुष्य से नौकरी छिन जाए, घरबार छूट जाए, स्त्री का त्याग हो जाए, भोग-विलास का त्याग हो जाए तो ऐसे त्याग अथवा अलगाव के पीछे अक्सर अलगावदी ग्रहों का प्रभाव रहता है। राहु, Read more
दशा और गोचर दशा उस पद्धति का नाम है जिसमें जन्मकालीन चन्द्राधिष्ठित नक्षत्र के स्वामी की अवधि के अनुसार जन्मकालीन ग्रह की दशा का निर्णय किया जाता है और तदनन्तर क्रमानुसार अन्य ग्रहों की दशाओं को निर्धारित किया जाता है। Read more
दशाफल रहस्य दशा के सम्बन्ध में शास्त्रों की कुछ बातें यहाँ लिखी जा रही हैं ताकि पाठक दशाभुक्ति का ठीक-ठाक फल कह सकें। 1. जो ग्रह आधिपत्य के कारण शुभ श्रेणी में है वह जितना अधिक बलवान् होगा उतना ही Read more
अन्तर्दशा की घटनाओं का निर्णय घटनाओं का स्वरूप भुक्तिनाथ तथा दशानाथ से पीड़ित अंगों द्वारा इस विषय का एक और नियम यह है कि वे भाव आदि दो अंग जो पापी दशानाथ तथा पापी भुक्तिनाथ दोनों से प्रभावित हों, अपने Read more
अन्तर्दशा की घटनाओं का निर्णय भुक्तिनाथ की स्थिति के द्वारा गत अध्याय में हमने इस बात का अध्ययन किया कि कुण्डली के शुभ अथवा योगकारक ग्रहों का निश्चय एक ही श्रेणी की अधिक संख्या में विद्यमान लग्नों से किया जाना Read more